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Fahmi Badayuni Shayari: कुछ न कुछ बोलते रहो हम से....दिलों को छू जाएंगे फ़हमी बदायूनी के ये शेर

Fahmi Badayuni Shayari:यार तुम को कहां कहां ढूंडा, जाओ तुम से मैं बोलता ही नहीं...फ़हमी बदायूनी की शायरी आज भी युवाओं के दिलों को छू जाती है। ऐसे में यहां पढ़ें फ़हमी बदायूनी की मशहूर शायरी।

Fahmi Badayuni Shayari- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Fahmi Badayuni Shayari
फ़हमी बदायूनी उर्दू अदब के एक बेहद मशहूर और बेहद मकबूल शायर थे। वो अपनी बेहद सरल भाषा में बहुत गहरी और दार्शनिक बातें कह जाने के हुनर के लिए जाने जाते थे। इंटरनेट और सोशल मीडिया के दौर में युवाओं के बीच उनकी शायरी को जबरदस्त लोकप्रियता मिली है। लोग उनकी शायरी को अपने स्टेट्स और स्टोरी में खूब लगाते हैं। 20 अक्टूबर 2024 को 72 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। फ़हमी बदायूनी को "छोटी बहर का उस्ताद" कहा जाता है। इसका मतलब है कि वे बहुत छोटे-छोटे और सीधे-सरल शब्दों का इस्तेमाल करके इंसानी जज्बातों, अकेलेपन, मोहब्बत और जिंदगी के सच को बयां कर देते थे। यही वजह है कि उनकी शायरी आज भी लोगों के दिलों को छू जाती है। यहां हम आपके लिए फ़हमी बदायूनी के कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें उनकी मशहूर शायरी। 
 
1. छत का हाल बता देता है
परनाले से गिरता पानी
 
2. कुछ न कुछ बोलते रहो हम से
चुप रहोगे तो लोग सुन लेंगे
 
3. यार तुम को कहां कहां ढूंडा
जाओ तुम से मैं बोलता ही नहीं
 
4. मर गया हम को डांटने वाला
अब शरारत में जी नहीं लगता
 
5. शहसवारों ने रौशनी मांगी
मैं ने बैसाखियां जला डालीं
 
6. फूलों को सुर्ख़ी देने में
पत्ते पीले हो जाते हैं
 
7. तोड़े जाते हैं जो शीशे
वो नोकीले हो जाते हैं
 
8. तिरी तस्वीर, पंखा, मेज़, मुफ़लर
मिरे कमरे में गर्दिश कर रहे हैं
 
9. पूछ लेते वो बस मिज़ाज मिरा
कितना आसान था इलाज मिरा
 
10. फिर उसी क़ब्र के बराबर से
ज़िंदा रहने का रास्ता निकला
 
11. कहीं कोई कमां ताने हुए है
कबूतर आड़े-तिरछे उड़ रहे हैं
 
12. टहलते फिर रहे हैं सारे घर में
तिरी ख़ाली जगह को भर रहे हैं
 
13. मुझ पे हो कर गुज़र गई दुनिया
मैं तिरी राह से हटा ही नहीं
 
14. मैं तो रहता हूं दश्त में मसरूफ़
क़ैस करता है काम-काज मिरा

15. काश वो रास्ते में मिल जाए
मुझ को मुंह फेर कर गुज़रना है

16. जब तलक क़ुव्वत-ए-तख़य्युल है
आप पहलू से उठ नहीं सकते

17. जो कहा वो नहीं किया उस ने
वो किया जो नहीं कहा उस ने

18. आज पैवंद की ज़रूरत है
ये सज़ा है रफ़ू न करने की

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