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Faiz Ahmad Faiz Shayari: मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है, मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़...फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर पहुंचाएंगे सुकून

Faiz Ahmad Faiz Shayari: फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911–1984) उर्दू अदब की वो शख़्सियत थे जिन्होंने शायरी को महज़ हुस्न-ओ-इश्क़ की गलियों से निकालकर ज़माने के कड़वे सच और इंक़लाब से जोड़ दिया। यहां हम उनके कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की शायरी।

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर दिलाएंगे सुकून- India TV Hindi
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ के ये शेर दिलाएंगे सुकून

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911–1984) बीसवीं सदी के सबसे प्रभावशाली उर्दू शायरों में से एक थे। वे केवल एक कवि ही नहीं, बल्कि एक प्रखर पत्रकार, क्रांतिकारी विचारक और मानवता के पैरोकार भी थे। फ़ैज़ की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि उन्होंने 'इश्क़' और 'इंक़लाब' को एक धागे में पिरो दिया। जहां उनकी शायरी में महबूब की यादों की नरमी है, वहीं समाज के दबे-कुचले लोगों के लिए आवाज़ उठाने का जज़्बा भी है। उनकी मशहूर नज़्म 'मुझसे पहली सी मोहब्बत मिरे महबूब न मांग' इसी बदलाव का प्रतीक है। ऐसे में यहां हम उनके कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की दिल को छू जाने वाली शायरी। 

1. सारी दुनिया से दूर हो जाए
जो ज़रा तेरे पास हो बैठे

2. सारी दुनिया से दूर हो जाए
जो ज़रा तेरे पास हो बैठे

3. आए कुछ अब्र कुछ शराब आए
इस के ब'अद आए जो अज़ाब आए

4. मेरी ख़ामोशियों में लर्ज़ां है
मेरे नालों की गुम-शुदा आवाज़

5. अपनी नज़रें बिखेर दे साक़ी
मय ब-अंदाज़ा-ए-ख़ुमार नहीं

6. और क्या देखने को बाक़ी है
आप से दिल लगा के देख लिया

7. जवां-मर्दी उसी रिफ़अत पे पहुंची
जहां से बुज़दिली ने जस्त की थी

8. दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के
वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

9. जानता है कि वो न आएँगे
फिर भी मसरूफ़-ए-इंतिज़ार है दिल

10. हर सदा पर लगे हैं कान यहां
दिल संभाले रहो ज़बां की तरह

11. आप की याद आती रही रात भर
चांदनी दिल दुखाती रही रात भर

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