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Munawwar Rana Shayari: घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं...यहां पढ़ें मुनव्वर राना की मशहूर शायरी

Munawwar Rana Shayari: मुनव्वर राना किसी पहचान के मौहताज नहीं हैं। वो अपनी शायरी और कविताओं के लिए दुनियाभर में जाने जाते थे। यहां हम मुनव्वर राना की मशहूर शायरी लेकर आए हैं जो आपके दिलों को छू जाएगी।

 मुनव्वर राना की मशहूर शायरी- India TV Hindi
Image Source : PTI मुनव्वर राना की मशहूर शायरी

मुनव्वर राना भारत के एक बेहद लोकप्रिय और मशहूर उर्दू शायर और कवि थे। उन्हें मुख्य रूप से उनकी बेहद सरल और दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाना जाता है। मुनव्वर राना को पूरी दुनिया में 'मां' पर लिखी गई उनकी अद्भुत और भावुक शायरियों के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपनी कविताओं में मां के प्रेम, उसके त्याग और ममता को जिस सादगी और गहराई के साथ बयां किया, उसने उन्हें हर आम और खास के बीच लोकप्रिय बना दिया। उनका एक बहुत मशहूर शेर है किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकां आई, मैं घर में सब से छोटा था मेरे हिस्से में मां आई।" यहां हम मुनव्वर राना के मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें उनकी शायरी। 

1. अब जुदाई के सफ़र को मिरे आसान करो
तुम मुझे ख़्वाब में आ कर न परेशान करो

2. हमारी दोस्ती से दुश्मनी शर्माई रहती है
हम अकबर हैं हमारे दिल में जोधाबाई रहती है

3. मुझे भी उस की जुदाई सताती रहती है
उसे भी ख़्वाब में बेटा दिखाई देता है

4. शायद जली हैं फिर कहीं नज़दीक बस्तियाँ
गुज़रे हैं कुछ परिंदे इधर से डरे हुए

5. हम नहीं थे तो क्या कमी थी यहाँ
हम न होंगे तो क्या कमी होगी

6. देखना है तुझे सहरा तो परेशाँ क्यूँ है
कुछ दिनों के लिए मुझ से मिरी आँखें ले जा

7. तुम्हारी आंखों की तौहीन है ज़रा सोचो
तुम्हारा चाहने वाला शराब पीता है

8. चलती फिरती हुई आँखों से अज़ाँ देखी है
मैं ने जन्नत तो नहीं देखी है माँ देखी है

9. बर्बाद कर दिया हमें परदेस ने मगर
माँ सब से कह रही है कि बेटा मज़े में है

10. फिर कर्बला के ब'अद दिखाई नहीं दिया
ऐसा कोई भी शख़्स कि प्यासा कहें जिसे

11. घर में रहते हुए ग़ैरों की तरह होती हैं
लड़कियां धान के पौदों की तरह होती हैं

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