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Nida Fazli Shayari: अब किसी से भी शिकायत न रही...यहां पढ़ें निदा फाज़ली की शायरी

Nida Fazli Shayari: कहां चराग़ जलाएं कहां गुलाब रखें, छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता, अगर आप शेरों शायरी के शौकीन हैं तो यहां पढ़ें निदा फाज़ली की मशहूर शायरी।

Nida Fazli Shayari- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV Nida Fazli Shayari

निदा फ़ाज़ली उर्दू और हिंदी साहित्य के एक बेहद मशहूर शायर, कवि और गीतकार थे। उनका असली नाम मुक़्तदा हसन था। वे अपनी सरल, सुगम और दिल को छू लेने वाली शायरी के लिए जाने जाते हैं। निदा फ़ाज़ली की सबसे बड़ी खूबी यह थी कि वे जटिल से जटिल दार्शनिक बातों को भी बहुत आसान और बोलचाल की भाषा में कह देते थे। उनकी शायरी में उर्दू के साथ-साथ हिंदी और लोकभाषा के शब्दों का खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। उन्होंने अपनी रचनाओं में आम इंसान के सुख-दुख, रिश्तों की कशमकश, सांप्रदायिक सौहार्द और समकालीन समाज की सच्चाईयों को प्रमुखता से दिखाया। यहां हम निदा फाजली की मशहूर शायरी लेकर आए हैं। यहां पढ़ें उनके मशहूर शेर। 

1. अपने लहजे की हिफ़ाज़त कीजिए
शेर हो जाते हैं ना-मालूम भी

2. बहुत मुश्किल है बंजारा-मिज़ाजी
सलीक़ा चाहिए आवारगी में

3. कहां चराग़ जलाएं कहां गुलाब रखें
छतें तो मिलती हैं लेकिन मकाँ नहीं मिलता

4. हम भी किसी कमान से निकले थे तीर से
ये और बात है कि निशाने ख़ता हुए

5. बृन्दाबन के कृष्ण कन्हय्या अल्लाह हूं
बंसी राधा गीता गैय्या अल्लाह हूं

6. घी मिस्री भी भेज कभी अख़बारों में
कई दिनों से चाय है कड़वी या अल्लाह

7. और क्या चाहिए जीने के लिए
रोज़ मिल जाती है पीने के लिए

8. कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता
कहीं ज़मीन कहीं आसमां नहीं मिलता

9. गिरजा में मंदिरों में अज़ानों में बट गया
होते ही सुब्ह आदमी ख़ानों में बट गया

10. यहां किसी को कोई रास्ता नहीं देता
मुझे गिरा के अगर तुम सँभल सको तो चलो

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