तहज़ीब हाफ़ी मौजूदा दौर के एक बेहद लोकप्रिय और मशहूर उर्दू शायर हैं। वे अपनी सादगी, गहरे जज्बात और बात कहने के अनोखे अंदाज के लिए युवाओं के बीच काफी पसंद किए जाते हैं। सोशल मीडिया, यूट्यूब और मुशायरों की दुनिया में उनकी शायरी के लाखों दीवाने हैं। तहज़ीब हाफ़ी की शायरी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे बेहद आम और बोलचाल की भाषा में गहरी से गहरी बात कह जाते हैं। उनकी रचनाओं में मोहब्बत, जुदाई, अकेलापन और जिंदगी के फलसफे का बड़ा ही खूबसूरत मेल देखने को मिलता है। यहां हम उनके कुछ मशहूर शेर लेकर आए हैं। यहां पढ़ें उनकी फेमस शायरी।
1. पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे
मैं जंगल में पानी लाया करता था
2. दास्तां हूं मैं इक तवील मगर
तू जो सुन ले तो मुख़्तसर भी हूं
3. अपनी मस्ती में बहता दरिया हूं
मैं किनारा भी हूं भंवर भी हूं
4. तुझ को पाने में मसअला ये है
तुझ को खोने के वसवसे रहेंगे
5. इक तिरा हिज्र दाइमी है मुझे
वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
6. आसमां और ज़मीं की वुसअत देख
मैं इधर भी हूँ और उधर भी हूं
7. कोई कमरे में आग तापता हो
कोई बारिश में भीगता रह जाए
8. बता ऐ अब्र मुसावात क्यूं नहीं करता
हमारे गांव में बरसात क्यूँ नहीं करता
9. इस लिए रौशनी में ठंडक है
कुछ चराग़ों को नम किया गया है
10. तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएं
समुंदरों से अकेले में बात करनी है
11. नींद ऐसी कि रात कम पड़ जाए
ख़्वाब ऐसा कि मुंह खुला रह जाए
12. ये एक बात समझने में रात हो गई है
मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
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