Chanakya Niti: हम अपने जीवन में कई ऐसे काम करते हैं। जिनसे कारण ऐसी परेशानियों का सामना करना पडता है जिनके बारे में हमने कभी सोचा भी नहीं होगा कि आखिर ये समस्याओं क्यों हो रही है? इसी कारण चाणक्य ने जीवन को सुखी रखने के लिए चाणक्य नीति की रचना की थी। चाणक्य ही वो महान इंसान थे जिन्होंने सामान्य से दिखने वाले बालक चंद्रगुप्त को अखंड भारत का सम्राट बना दिया था। चाणक्य नीति में कई ऐसी चीजों के बारे में बताया गया है जिन्हें अपनाकर आप हर समस्या से निजात पा सकते है। जानें ऐसे ही एक नीति के बारे में।
चाणक्य नीति ग्रंथ के तीसरे अध्याय का 21वां श्लोक में चाणक्य ने लिखा है-
मूर्खा यत्र न पूज्यन्ते धान्य यत्र सुसंचितम्।
दंपतो: कलहो नास्ति तत्र श्री: स्वयमागता।।
इस श्लोक का मतलब है कि जिस जगह पर मूर्खों की पूजा नहीं की जाती है बल्कि सिर्फ ज्ञानियों का सम्मान होता है। जो लोग ज्ञानियों द्वारा बताई गई बातों पर अमल करते हैं। ऐसे लोग हमेशा धन-धान्य से भरे होते है। कभी भी घर में लड़ाई नहीं होती, हर कोई एक-दूसरे से प्रेम करता है। ऐसी जगह पर हमेशा लक्ष्मी का वास होता है।
वहीं दूसरी ओर जो लोग मुर्ख इंसान की पूजा करते है और ज्ञानियों का सम्मान नहीं करते है। ऐसे घर में कभी भी लक्ष्मी का वास नहीं होता है। हमेशा जरा सी बात में पति-पत्नी में लड़ाई होती है, धन नष्ट हो जाता है। हर एक चीज बर्बाद हो जाती है।
इसलिए चाणक्य ने कहा कि हमेशा खुश रहना चाहते है तो मूर्खों से संगति करने से बचे। तभी आपका जीवन सुख के साथ-साथ परिवार में प्रेम रहेगा।
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