आचार्य विष्णु गुप्त जिन्हें चाणक्य के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने अर्थशास्त्र की रचना की, जिसमें उन्होंने राजनीति के तमाम गुरों के भेदों को उजागर किया है। आचार्य चाणक्य की बातें आज के वक्त भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी उनके वक्त में थी। आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ नीतिशास्त्र में श्लोकों के माध्यम में अपनी शिक्षाओं दी हैं।
श्लोक
धनिक: श्रोत्रियो राजा नदी वैद्यस्तु पंचम:।
पंच यत्र न विद्यन्ते तत्र दिवसं न वसेत्।।
इस श्लोक के माध्यम से आचार्य चाणक्य बताते हैं जहां कोई वेदपीठ विद्वान, सेठ, राजा और वैद्य न हो, जिस जगह कोई नदी न हो वहां एक दिन भी नहीं रहना चाहिए।
आसान भाषा में समझें तो आचार्य चाणक्य उस जगह पर वास नहीं करने की सलाह देते हैं
- जहां को कोई अस्पताल या डॉक्टर नहीं हो।
- जहां कोई सेठ या महाजन नहीं रहता हो
- जहां कोई नदी नहीं बहती हो।
- जहां विद्वान-कर्मकांडी नहीं रहता हो।
- जहां कोई शासन व्यवस्था न हो।
- जहां कोई राजा न हो।
आचार्य चाणक्य के मुताबिक, सफल जीवन जीने के लिए इन चीजों की बहुत आवश्यकता होती है। जब किसी व्यक्ति को धन की आवश्यकता होगी तो सेठ इसे पूरा कर सकता है। किसी कर्मकांड के लिए विद्वान-कर्मकांडी की आवश्यकता होती है। राज्य की सत्ता संभालने के साथ-साथ वहां कानून और व्यवस्था कायम रखने के लिए राजा या शासक की आवश्कता होती है।
आचार्य चाणक्य के अनुसार, रोग के निवारण के लिए वैद्य की जरूरत होती है और जल की आपूर्ति के लिए नदी की। जहां ये चीजें नहीं हैं वहां आचार्य चाणक्य वास न करने की सलाह देते हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इंडिया टीवी इस बारे में किसी तरह की कोई पुष्टि नहीं करता है। इसे सामान्य जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है।)
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