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भाजपा का मिशन महानगरपालिका: घर-घर पहुंच, लाभार्थियों से सीधा संवाद, जानें 40 सूत्रीय कार्यक्रम में क्या-क्या होगा?

40 सूत्रीय कार्यक्रम में प्रभावशाली वर्ग से संवाद, लाभार्थियों से व्यक्तिगत मुलाकात और संघ परिवार से समन्वय शामिल है। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार की 122 जन-कल्याणकारी योजनाओं को समाहित करते हुए एक विशेष पंपलेट तैयार किया गया है।

Devendra Fadnvis- India TV Hindi
Image Source : PTI देवेंद्र फडणवीस

आगामी महानगरपालिका चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और नेताओं के लिए 40 सूत्रीय कार्यक्रम तय किया है। इस कार्यक्रम को ‘मिशन महानगरपालिका’ के तहत गुरुवार से पूरे राज्य में लागू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार की 122 जन-कल्याणकारी योजनाओं को समाहित करते हुए एक विशेष पंपलेट तैयार किया गया है, जिसे घर-घर वितरित किया जाएगा। इसके लिए ‘घर चलो अभियान’ चलाया जाएगा। यह अभियान तीन दिनों का होगा और इसे 23 दिसंबर तक राज्य की प्रत्येक महानगरपालिका में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभार्थियों से सीधा संपर्क

‘मुख्यमंत्री लाडकी बहिण’ योजना सहित सभी जन-कल्याणकारी योजनाओं के तहत, प्रत्येक महानगरपालिका क्षेत्र में लाभार्थियों की सूची पहले से तैयार करने का काम पार्टी द्वारा शुरू कर दिया गया है। इन लाभार्थियों से व्यक्तिगत मुलाकात करना भी भाजपा के प्रचार अभियान का अहम हिस्सा होगा।

प्रभावशाली वर्ग से संवाद

वकील, डॉक्टर, चार्टर्ड अकाउंटेंट, इंजीनियर और समाज के अन्य प्रभावशाली व्यक्ति जो भाजपा से सीधे जुड़े नहीं हैं, उनसे स्थानीय पदाधिकारियों को मुलाकात करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों के जरिए पार्टी के प्रति उनकी अपेक्षाएं और सुझाव जानने पर जोर दिया गया है।

समाज बैठकों पर विशेष फोकस

बड़े समाजों के साथ-साथ छोटे-छोटे समाजों के प्रमुख नेताओं और कार्यकर्ताओं की बैठकें लेने, उन्हें पार्टी का एजेंडा समझाने और संवाद बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। इन समाजों के जो विभागीय या राज्य स्तरीय नेता भाजपा में हैं, उनके साथ समाज के लोगों का संवाद आयोजित करने पर भी जोर दिया गया है। विधानसभा चुनाव में छोटे समाजों के सहयोग को आगे भी मजबूत करने की रणनीति बनाई गई है।

संघ परिवार से समन्वय

इसके साथ ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, संघ परिवार और विचार परिवार के प्रमुख पदाधिकारियों को विश्वास में लेकर प्रचार तंत्र की योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विधानसभा चुनाव में इस समन्वय का बड़ा लाभ मिला था। नगर परिषद चुनावों में इस स्तर पर समन्वय की कमी को लेकर जो शिकायतें सामने आई थीं, उन्हें अब दूर करने का फैसला लिया गया है।

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