मुंबई में 697 परिवारों की दिवाली होगी खास, धनतेरस पर महाराष्ट्र सरकार ने सौंपी मकानों की चाबियां
मुंबई को स्लम फ्री बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एनएम जोशी लोअर परेल बीडीडी चॉल पुनर्विकास प्रोजेक्ट के 557 परिवारों को 500 स्क्वायर फीट के 2 BHK मकान मिले। वहीं,140 सफाई कर्मचारियों को भी आश्रय योजना के तहत 300 स्क्वायर फीट के घर की चाबियां सौंपी गईं।

धनतेरस के शुभ अवसर पर महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के 697 लाभार्थियों को उनके सपनों के घर की चाबियां सौंपीं। दो अलग-अलग योजनाओं के तहत ये मकान दिए गए। मुंबई के लोअर परेल स्थित एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल के 557 लोगों को 2 BHK मकान मिले, जबकि आश्रय योजना के तहत कोलाबा के सफाई कर्मचारियों को भी उनके घर की चाबियां सौंपी गईं।
जर्जर मकानों में रहने वालों को मिला सपनों का घर
सालों से छोटे और जर्जर मकानों में रहने वाले लोगों के लिए यह किसी सपने के सच होने जैसा है। मकान मिलने के बाद लाभार्थियों ने महाराष्ट्र सरकार का धन्यवाद किया। वहीं, सरकार ने कहा कि मुंबई को स्लम फ्री बनाने और भूमिपुत्रों को मुंबई में ही उनका घर देने का अभियान जारी रहेगा।
कॉमन टॉयलेट वाली छोटी कोठरी से निकले 2BHK फ्लैट तक... ऐसे हुआ पुनर्विकास
सबसे पहले बात करते हैं मुंबई के लोअर परेल स्थित एनएम जोशी मार्ग बीडीडी चॉल की। यहां बीडीडी चॉल पुनर्विकास योजना के तहत 557 परिवारों को उनके सपनों का घर मिला है।
- करीब चार साल पहले इस पुनर्विकास योजना को मंजूरी मिली थी और काम शुरू हुआ था। पुरानी इमारतों को तोड़कर दोबारा बनाने के लिए लोगों को दूसरी जगह शिफ्ट किया गया। इस दौरान म्हाडा की ओर से उन्हें चार साल तक किराया भी दिया गया। लोग अलग-अलग जगहों पर रहने चले गए। अब चार साल बाद नई इमारतें बनकर तैयार हो गई हैं और लोगों को उनके नए घर मिल गए हैं।
- इस पुनर्विकास की एक खास बात यह है कि महाराष्ट्र सरकार ने इस परियोजना का काम किसी निजी बिल्डर को सौंपने के बजाय अपनी सरकारी हाउसिंग एजेंसी म्हाडा के जरिए पूरा किया है। म्हाडा यानी महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी के माध्यम से सरकार चॉलों के पुनर्विकास का काम कर रही है। सरकार का कहना है कि आगे भी बीडीडी चॉल के बाकी हिस्सों का पुनर्विकास इसी तरह किया जाएगा और लोगों को उनके हक का पक्का मकान दिया जाएगा।
- पहले बीडीडी चॉल में लोग महज 160 स्क्वायर फीट के छोटे से वन रूम किचन मकान में रहते थे। घर के अंदर टॉयलेट और बाथरूम की सुविधा नहीं थी। हर फ्लोर पर कॉमन टॉयलेट और बाथरूम थे। घर इतने छोटे थे कि मेहमान आने पर लोगों को परेशानी होती थी। सोने और आराम से रहने तक की जगह नहीं थी। महिलाओं को खास तौर पर कॉमन शौचालय का इस्तेमाल करना पड़ता था। कई बार परिवार में ज्यादा सदस्य होने के कारण लोगों को घर के बाहर लॉबी में सोना पड़ता था।
- किसी ने इन चॉल में 50 साल बिताए, किसी ने 25 साल तो किसी ने 15 साल। उनकी दूसरी और तीसरी पीढ़ी भी इन्हीं मकानों में रह रही थी। इन लोगों ने कभी सोचा भी नहीं था कि उन्हें 500 स्क्वायर फीट का बड़ा 2 BHK मकान मिलेगा।
Image Source : reporter inputबीडीडी चॉल के लोगों को मिला 2BHK फ्लैट।
'मकान बेचकर दूसरी जगह रहने न जाएं', CM फडणवीस की अपील
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई की चॉल में रहने वाले मराठी मानुस ने मराठी संस्कृति और इतिहास को संजोकर रखा है। आज उन्हें अपने सपनों का घर मिला है। मुख्यमंत्री ने लाभार्थियों से अपील की कि वे अपने मकान बेचकर दूसरी जगह रहने के लिए न जाएं। वहीं, डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा कि महायुति सरकार ने बीडीडी चॉल पुनर्विकास योजना के तहत 557 लोगों को मकान दिए हैं। इसके अलावा आश्रय योजना के तहत 140 सफाई कर्मचारियों को भी 300 स्क्वायर फीट के घर की चाबियां सौंपी गई हैं, जो कोलाबा में हैं।
उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारी सुबह उठकर मुंबई की गंदगी साफ करते हैं और सड़कों को स्वच्छ रखते हैं। ऐसे कर्मचारियों को भी सरकार ने उनके सपनों का घर दिया है। सरकार अलग-अलग चरणों में पुनर्विकास का काम पूरा कर रही है। बीडीडी चॉल के बाकी हिस्सों का भी पुनर्विकास किया जाएगा और लोगों को उनके सपनों का घर दिया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य, 2029 तक बीडीडी चॉल का पूरा कायाकल्प
बहरहाल, महाराष्ट्र सरकार का लक्ष्य 2029 तक मुंबई की वर्ली, नायगांव और दूसरी जगहों पर स्थित बीडीडी चॉल का पुनर्विकास पूरा करना है। सरकार का प्रयास है कि जिन लोगों को पहले 160 स्क्वायर फीट के छोटे मकानों में रहना पड़ता था, उन्हें 500 स्क्वायर फीट के बड़े मकान मिलें। इस पूरी परियोजना में सरकार म्हाडा के जरिए पुनर्विकास का काम कर रही है, ताकि निजी बिल्डर के बजाय सरकारी हाउसिंग एजेंसी के माध्यम से लोगों को उनके घर उपलब्ध कराए जा सकें।
इसके साथ ही सरकार ने मुंबई को स्लम फ्री बनाने और गरीबों के साथ-साथ भूमिपुत्रों को मुंबई में ही घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है।
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