महाराष्ट्र में महानगरपालिका चुनावों से पहले भाजपा–शिवसेना (शिंदे गुट) की महायुति कई प्रमुख शहरों में टूट गई है, जिससे राज्य की राजनीति में बड़ी उथल-पुथल मच गई है। अलग-अलग शहरों में अब नए गठबंधन, एकतरफा चुनाव और बदले हुए समीकरण सामने आ रहे हैं। बता दें कि मुंबई समेत 29 महानगर पालिकाओं के लिए 15 जनवरी को वोटिंग होगी और काउंटिंग अगले दिन 16 जनवरी को होगी।
इन महानगरपालिकाओं में टूटी भाजपा–शिवसेना
मीरा-भायंदर, धुले, नवी मुंबई, पुणे, नासिक, नांदेड़, छत्रपति संभाजीनगर, अमरावती, अकोला, मालेगांव, अहिल्यानगर।
शहरवार राजनीतिक स्थिति-
अहिल्यानगर- अहिल्यानगर महानगरपालिका में भी भाजपा और शिवसेना शिंदे गुट की युति टूट गई है। अब भाजपा और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार गुट) के बीच गठबंधन तय माना जा रहा है, जबकि शिवसेना अकेले मैदान में उतरेगी।
नासिक- नासिक में सियासी समीकरण बिल्कुल उलट हैं। यहां अजित पवार गुट और शिवसेना शिंदे गुट एक साथ चुनाव लड़ेंगे, जबकि भारतीय जनता पार्टी अकेले अपने दम पर चुनाव लड़ेगी। नासिक महानगरपालिका में कुल 122 पार्षद सीटें हैं।
धुले- धुले में भाजपा-शिवसेना युति टूटने के बाद अब शिवसेना शिंदे गुट और एनसीपी (अजित पवार) के बीच गठबंधन लगभग तय हो चुका है। सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना- 60 सीटें, एनसीपी (अजित पवार) – 40 सीटें, मुस्लिम बहुल इलाकों को छोड़कर यह गठबंधन लागू रहेगा। आधिकारिक घोषणा आज शाम तक होने की संभावना है।
जलगांव- जलगांव में महायुति आखिरकार बन गई है, लेकिन कड़ी खींचतान के बाद।
सीट बंटवारा इस प्रकार है-
भाजपा- 42 सीटें
शिवसेना (शिंदे गुट)- 23 सीटें
एनसीपी (अजित पवार)- 6 सीटें
सांगली–मिरज –कुपवाड
यहां शिवसेना शिंदे गुट को सम्मानजनक सीटें नहीं मिलने के कारण पार्टी ने सभी 78 सीटों पर स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
कोल्हापुर- राज्य में केवल कोल्हापुर में महायुति पूरी तरह सफल मानी जा रही है।
भाजपा – 36 सीटें
शिवसेना (शिंदे गुट) – 30 सीटें
एनसीपी (अजित पवार) – 15 सीटें
इचलकरंजी- इचलकरंजी में भी महायुति बनी है।
भाजपा – 52 सीटें
शिवसेना (शिंदे गुट) – 11 सीटें
एनसीपी (अजित पवार) – 2 सीटें
लगातार टूटती-बनती युतियों से साफ है कि स्थानीय समीकरणों और सीट बंटवारे ने महायुति की एकता को गहरा झटका दिया है। कई शहरों में शिवसेना शिंदे गुट और भाजपा अलग-अलग राह पर नजर आ रहे हैं, तो कहीं एनसीपी (अजित पवार) नए सत्ता संतुलन की अहम कड़ी बनकर उभर रही है। अब देखना अहम होगा कि यह बिखराव मतदाताओं के फैसले को किस दिशा में मोड़ता है और किस शहर में कौन-सा नया गठबंधन सत्ता की कुर्सी तक पहुंच पाता है।
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