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'CM फडणवीस महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाना चाहते हैं...', आदित्य ठाकरे ने क्यों लगाया ऐसा आरोप?

महाराष्ट्र के रायगढ़ में प्रोजेक्ट के लिए पेड़ों की कटाई का मामला गरमा गया है। अब शिवसेना यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया है कि राज्य के CM देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाना चाहते हैं।

Aaditya Thackeray targets CM Devendra Fadnavis- India TV Hindi
Image Source : PTI आदित्य ठाकरे ने सीएम फडणवीस पर साधा निशाना।

महाराष्ट्र के रायगढ़ के कर्जत में हाइड्रो इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के लिए हजारों पेड़ों को काटे जाने के मुद्दे पर हंगामा मचा हुआ है। विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है। अब शिवसेना यूबीटी के नेता और उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे ने सीएम फडणवीस पर बड़ा हमला बोला है। आदित्य ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि महाराष्ट्र ने ऐसा कौन-सा पाप किया है कि उसे ऐसे मुख्यमंत्री मिले हैं, जो पूरे महाराष्ट्र को खत्म करने पर तुले हुए हैं? वहां का (कर्जत का) पूरा इलाका पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र यानी इको-सेंसिटिव जोन है। यह जंगल और वन क्षेत्र है। इस वन क्षेत्र में कई तरह के पेड़-पौधे और जीव-जंतु पाए जाते हैं, जिनमें से कई लुप्तप्राय प्रजातियों (एंडेंजर्ड) या स्थानिक प्रजातियों (एंडेमिक) की सूची में शामिल हैं। कुछ प्रजातियां केवल इसी क्षेत्र में पाई जाती हैं, जबकि कुछ के अस्तित्व पर खतरा ज्यादा है।

महाराष्ट्र को रेगिस्तान बनाने की सोच- आदित्य

शिवसेना यूबीटी के नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि "इस परियोजना का विरोध सिर्फ विरोध करने के लिए नहीं किया जा रहा है। सवाल यह है कि पंप्ड स्टोरेज परियोजना के लिए इतनी बड़ी जगह को ही क्यों चुना गया? सरकार को भी पता है कि महाराष्ट्र में जहां भी वन भूमि है, वहां की जमीन उद्योगपतियों को दी जा सकती है। पहले भी मुख्यमंत्री ऐसा कर चुके हैं। उन्हें लगता है कि जहां जंगल हैं, वहां की जमीन किसी भी उद्योगपति को दी जा सकती है और उस जगह को रेगिस्तान में बदला जा सकता है। मुख्यमंत्री महोदय की यही सोच है कि महाराष्ट्र को रेगिस्तान बना दिया जाए। तकलीफ इस बात की होती है कि यह वन संपदा महाराष्ट्र की संपत्ति है, यह हमारा धन है। लेकिन सरकार जंगलों को खत्म करके इस संपत्ति को बेचने में लगी हुई है। जंगलों को खत्म करके कोई भी परियोजना क्लीन प्रोजेक्ट नहीं हो सकती।"

मीडिया के सामने बहस की चुनौती

आदित्य ठाकरे ने कहा- "जो लोग हमें महाराष्ट्रद्रोही कहते हैं और हमें अर्बन नक्सल कहेंगे, वे खुद महाराष्ट्रद्रोही हैं। इस परियोजना और इस कंपनी के लिए आदेश कहां से आए हैं, यह सवाल उन्हें खुद से पूछना चाहिए। उन्हें आईने में देखकर खुद से इसका जवाब मांगना चाहिए। शायद इसी परियोजना के लिए यहां बीएसएफ भी तैनात की जा सकती है या किसी दूसरी फोर्स को तैनात किया जा सकता है, क्योंकि इनके लिए परियोजना ज्यादा महत्वपूर्ण है। देश के नागरिक इनके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं। अगर मुख्यमंत्री को लगता है कि इस मामले में हमारे पास जो जानकारी है, उसमें कोई कमी है, तो आइए मुख्यमंत्री महोदय, आप और हम उसी जंगल में चलते हैं और मीडिया के सामने इस मुद्दे पर बहस करते हैं। महाराष्ट्र में विदर्भ, मराठवाड़ा और दूसरे कई इलाकों में लगभग 75 प्रतिशत क्षेत्रों और तालुकों में सूखा घोषित किया जा चुका है। अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही, तो सूखा सालों तक जारी रहेगा और लोगों को कोई राहत नहीं मिलेगी।"

मानसून पर निर्भरता को बढ़ाया जा रहा- आदित्य

आदित्य ठाकरे ने कहा- "जहां बारिश होनी चाहिए, वहां बारिश नहीं हो रही है। इसके बावजूद आप मानसून पर निर्भरता लगातार बढ़ाते जा रहे हैं। जब हम मानसून की बात करते हैं, तो उसके बनने में पर्यावरण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आप उसी पर्यावरण को नष्ट करना चाहते हैं। यह कैसी विचारधारा है? बीजेपी की यह सोच हमारे धर्म में बताए गए पंचतत्वों के भी खिलाफ है। पंप्ड स्टोरेज परियोजना से कितनी नौकरियां पैदा होती हैं? पहले यह देखिए। ऐसी परियोजनाओं से 50 से ज्यादा से ज्यादा 60 नौकरियां ही पैदा हो सकती हैं।"

100 लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज किया गया- आदित्य

आदित्य ठाकरे ने आगे कहा- "सभी परमिशन देने का अधिकार सरकार के हाथ में है। जब किसी को जरूरत होती है, तो जंगल काटने की अनुमति एक रात में दे दी जाती है। परियोजना के लिए सभी जरूरी परमिशन और जनरल क्लियरेंस होने का दावा किया जा रहा है। तो हमें दिखाइए कि आपकी एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (EIA) रिपोर्ट कहां है? जनसुनवाई किस तरह हुई? कल मुझे बताया गया कि वहां जनसुनवाई के दौरान 106 लोगों ने अपनी बातें रखी थीं। इनमें से सिर्फ छह लोगों के सकारात्मक सुझावों को स्वीकार किया गया, जबकि 100 लोगों की आपत्तियों को नजरअंदाज कर दिया गया। क्या यह बात सच है? हमें पूरी सच्चाई दिखाइए।"

किसानों के मार्च पर भी बोले आदित्य

आदित्य ठाकरे ने अकोले से मुंबई तक किसानों के मार्च पर भी बात की। आदित्य ठाकरे ने कहा- "आपको याद होगा कि 2016 या 2017 में भी इसी तरह के लॉन्ग मार्च निकाले गए थे। उस समय बीजेपी की सरकार ने प्रदर्शनकारियों को माओवादी, अर्बन नक्सल और न जाने कितने अलग-अलग नाम दिए थे। उस समय हम भी सरकार में थे। इसके बावजूद हम उन प्रदर्शनकारियों से मिलने गए थे। बीजेपी ने कहा था कि उनका झंडा लाल है, इसलिए वे अर्बन नक्सल बन गए हैं। लेकिन मैंने तब भी यही कहा था कि झंडे का रंग लाल हो सकता है, लेकिन खून का रंग भी लाल ही होता है। वे इंसान हैं, किसान हैं, कामगार हैं और मजदूर हैं। मुझे लगता है कि इस जमीन पर पहला अधिकार किसानों और आदिवासियों का होना चाहिए। सरकार को उनकी बातें सुननी चाहिए।"

बीजेपी और सत्ता परिवर्तन पर निशाना

बीजेपी के लोग सत्ता परिवर्तन की बात से डरते हैं। लेकिन पैसे के दम पर विधायकों और सांसदों को खरीदकर और राजनीतिक पार्टियों को तोड़कर बीजेपी सत्ता परिवर्तन करती है। अब तो टाटा कंपनी को भी तोड़ने की बात हो रही है। इन्हें चुनाव की व्यवस्था अपने हाथ में लेनी थी। यह कैसी बीजेपी है? यह सत्ता परिवर्तन की बात क्या करेगी?

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