नई दिल्ली। देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट पेश करेंगी। यह निर्मला सीतारमण का भी पहला बजट है। बजट को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। लोगों को उम्मीद है कि इस बजट से न केवल देश की अर्थव्यवस्था की सेहत सुधरेगी बल्कि आम लोगों को भी राहत मिलेगी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक बजट तैयार करने में मुख्य रूप से 6 दिग्गज अधिकारियों समेत वित्त राज्य मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की मदद की है। आइए आपको बताएं कि इस टीम में कौन-कौन शामिल है।
अनुराग सिंह ठाकुर, वित्त राज्य मंत्री
Image Source : PTIअनुराग सिंह ठाकुर, वित्त राज्य मंत्री
हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर से चौथी बार सांसद बने अनुराग ठाकुर को मोदी 2.0 में वित्त राज्यमंत्री बनाया गया है। भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष ठाकुर ने 26 जनवरी 2011 को लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कोलकाता से श्रीनगर तक की राष्ट्रीय एकता यात्रा की थी। वह मई 2016 से फरवरी 2017 तक BCCI के अध्यक्ष रहे। अनुराग को 2011 में सर्वश्रेष्ठ युवा सांसद का पुरस्कार मिला था।
कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम, मुख्य आर्थिक सलाहकार
Chief Economic Advisor Krishnamurthy Subramanian
बजट 2019 को लेकर इस टीम में सबसे पहला नाम मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) के. सुब्रमण्यन का है। सुब्रमण्यन ने अमेरिका के शिकागो यूनिवर्सिटी से फाइनेंशियल इकोनॉमिक्स से पीएचडी की है। सुब्रमण्यम की गिनती दुनिया के टॉप बैंकिंग, कॉर्पोरेट गवर्नेंस और इकनॉमिक पॉलिसी एक्सपर्ट में होती है। उन्होंने 8 नवंबर 2016 को केंद्र सरकार द्वारा की गई नोटबंदी का भी समर्थन किया था।
वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग
Subhash Chandra Garg, Finance secretary
वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग 1983 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी हैं। लंबे समय से वित्त मंत्रालय से जुड़े होने के कारण सुभाष गर्ग ने कई बजट देखे हैं। फिलहाल गर्ग मंत्रालय में विदेशी पूंजी बाजारों, कैपिटल मार्केट, बजट और इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस पर नजर रख रहे हैं। गर्ग इससे पहले विश्व बैंक में कार्यकारी निदेशक रहे चुके हैं। अलग-अलग संस्थानों को फंडिंग देने पर फैसला लेने का अधिकार भी उनके पास है। अब देखना होगा कि वित्त सचिव व आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष गर्ग अर्थव्यस्था की चुनौतियों से कैसे निपटेंगे। क्योंकि आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त है, खपत घट रही है, निजी निवेश कम हो रहा है। इन चुनौतियों से उबरने के लिए ऐसे कदम उठाने होंगे, जिनसे राजकोषीय मजबूती के रोडमैप पर कोई असर न पड़े। ऐसे में उनका अनुभव काफी काम आएगा।