नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 2019 के लिए 4.8 प्रतिशत कर दिया है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने दावोस में सोमवार को कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि दर 2020 में 5.8 प्रतिशत और 2021 में 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है।
आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री भारतवंशी गीता गोपीनाथ ने कहा कि भारत में आर्थिक वृद्धि दर की रुकावट मुख्यरूप से गैर-बैंकिंग वित्त क्षेत्र में तनाव और ग्रामीण आय में कमजोर वृद्धि है।
आईएमएफ ने भारत के साथ ही वैश्विक अर्थव्यवस्था के अपने वृद्धि परिदृश्य के बारे में मामूली संशोधन करते हुए इसे थोड़ा कम किया है। आईएमएफ प्रमुख क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि वैश्विक व्यापार प्रणाली में सुधार से जुड़े बुनियादी मुद्दे अभी भी मौजूद हैं। पश्चिमी एशिया में कुछ घटनाक्रम देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि नीति निर्माताओं को व्यवहारिक कदम उठाने जारी रखने चाहिए, यही उनको हमारी सलाह है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के सालाना शिखर सम्मेलन के उद्घाटन से पहले मुद्राकोष की प्रबंध निदेशक क्रिस्टलीना जॉर्जिवा ने कहा कि कोष का नीति निर्माताओं को बस यही सरल सा सुझाव है कि वे वह सब करते रहें, जो परिणाम दे सकें जिसे व्यवहार में लाया जा सके। उन्होंने आगाह करते हुए कहा कि अगर वृद्धि में फिर से नरमी आती है तो हर किसी को समन्वित तरीके से फिर से और तत्तकाल कदम उठाने के लिए तैयार रहना चाहिए।
आईएमएफ ने कहा कि हम अभी बदलाव बिंदु पर नहीं पहुंचे हैं यही वजह है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए वृद्धि परिदृश्य को मामूली कम किया जा रहा है। आईएमएफ की मुख्य अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने कहा कि अमेरिका-चीन व्यापार समझौते पर मामला आगे बढ़ने के साथ अक्टूबर से जोखिम आंशिक रूप से कम हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से भारत के आर्थिक वृद्धि अनुमान में कमी के कारण दो साल की वृद्धि दर में 0.1 प्रतिशत तथा उसके बाद के वर्ष के लिए 0.2 प्रतिशत की कमी की गई है।
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