शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों के लिए जल्द बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट्स के स्ट्राइक प्राइस को लेकर नया डायनामिक फ्रेमवर्क प्रस्तावित किया है। इसका मकसद बाजार में तेज उतार-चढ़ाव के दौरान भी ट्रेडर्स को लगातार ट्रेडिंग का मौका देना है।
SEBI का मानना है कि कई बार बाजार में अचानक बड़ी तेजी या गिरावट आने पर मौजूदा स्ट्राइक प्राइस पर्याप्त नहीं रहते। इससे ट्रेडर्स को सही लेवल पर ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट नहीं मिल पाते और उन्हें नुकसान उठाना पड़ता है।
क्या है नया प्रस्ताव?
SEBI ने सुझाव दिया है कि स्टॉक एक्सचेंज बाजार की स्थिति के हिसाब से नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ सकें। यानी अगर बाजार तेजी से ऊपर या नीचे जाता है, तो उसी दौरान नए ऑप्शन कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च किए जा सकेंगे। इसके अलावा एक्सचेंज रोजाना स्ट्राइक प्राइस की समीक्षा भी करेंगे। जो स्ट्राइक प्राइस बाजार से बहुत दूर हो जाएंगे, उन्हें हटाया जा सकता है। इससे ट्रेडिंग सिस्टम ज्यादा व्यवस्थित और एक्टिव बना रहेगा।
ट्रेडर्स को कैसे होगा फायदा?
नए नियम लागू होने के बाद ऑप्शन ट्रेडर्स को बाजार के मौजूदा स्तर के आसपास ज्यादा कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध होंगे। इससे उन्हें बेहतर ट्रेडिंग अवसर मिलेंगे और अचानक आई वोलैटिलिटी के दौरान भी ट्रेडिंग जारी रख सकेंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे खासकर इंट्राडे और हाई-वोलैटिलिटी ट्रेडर्स को बड़ा फायदा होगा। कई बार बाजार तेजी से भागता है और उपलब्ध स्ट्राइक प्राइस खत्म जैसे हो जाते हैं। ऐसे में नया सिस्टम ट्रेडिंग को आसान बनाएगा।
इक्विटी, करेंसी और कमोडिटी पर भी लागू होंगे नियम
SEBI का यह प्रस्ताव सिर्फ इक्विटी ऑप्शन तक सीमित नहीं रहेगा। इसे करेंसी और कमोडिटी ऑप्शन सेगमेंट में भी लागू किया जा सकता है। हालांकि अलग-अलग सेगमेंट में एक्सचेंज अपनी जरूरत के हिसाब से नियम तय कर सकेंगे।
सिस्टम में नहीं करना होगा बड़ा बदलाव
SEBI ने साफ किया है कि नए स्ट्राइक प्राइस जोड़ने की प्रक्रिया ऐसी होगी, जिससे ब्रोकर्स और ट्रेडर्स को अपने सिस्टम में बड़े तकनीकी बदलाव नहीं करने पड़ेंगे। यानी लाइव ट्रेडिंग के दौरान भी यह प्रक्रिया आसानी से चल सकेगी।
15 जून तक मांगे गए सुझाव
SEBI ने इस प्रस्ताव पर जनता और बाजार भागीदारों से 15 जून 2026 तक सुझाव मांगे हैं। इसके बाद अंतिम नियम तैयार किए जाएंगे। अगर यह नया फ्रेमवर्क लागू होता है, तो भारतीय शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग का तरीका काफी बदल सकता है और ट्रेडर्स को पहले से ज्यादा लचीलापन मिल सकता है।
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