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F&O ट्रेडर्स को 440 वोल्ट का झटका! फ्यूचर एंड ऑप्शन ट्रेडिंग पर अब देना होगा ज्यादा TAX, जानिए कितना लगेगा STT?

शेयर बाजार में एक्टिव ट्रेडिंग करने वालों के लिए बजट 2026 किसी झटके से कम नहीं रहा। डेरिवेटिव सेगमेंट, खासकर फ्यूचर एंड ऑप्शन (F&O) में ट्रेड करने वाले निवेशकों पर सरकार ने टैक्स का बोझ और बढ़ा दिया है।

F&O ट्रेडिंग होगी महंगी- India TV Hindi
Image Source : CANVA F&O ट्रेडिंग होगी महंगी

शेयर बाजार में रोजाना तेजी-मंदी के बीच कमाई का सपना देखने वाले F&O ट्रेडर्स के लिए बजट 2026 किसी झटके से कम नहीं रहा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी को संसद में बजट पेश करते हुए फ्यूचर और ऑप्शन सेगमेंट में सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बड़ी बढ़ोतरी का ऐलान किया। इस फैसले के बाद डेरिवेटिव ट्रेडिंग करने वाले निवेशकों की लागत सीधे तौर पर बढ़ गई है, जिससे बाजार में मायूसी साफ नजर आई।

फ्यूचर और ऑप्शन पर कितना बढ़ा टैक्स?

बजट 2026 के मुताबिक, फ्यूचर्स ट्रेडिंग पर STT को 0.02% से बढ़ाकर 0.05% कर दिया गया है। यानी इसमें करीब 150 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ऑप्शन ट्रेडिंग पर STT को 0.1% से बढ़ाकर 0.15% कर दिया गया है, जो करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी है। इस बदलाव का सीधा असर उन रिटेल और प्रोफेशनल ट्रेडर्स पर पड़ेगा जो रोजाना कई सौदे करते हैं।

क्या होता है STT और क्यों लगता है?

सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स यानी STT वह टैक्स है जो मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंज पर होने वाले हर सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन पर लिया जाता है। इसमें इक्विटी शेयर, म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स और ऑप्शंस सभी शामिल होते हैं। खास बात यह है कि STT लेनदेन के समय ही कट जाता है, चाहे निवेशक को मुनाफा हो या नुकसान।

भारत में कब लागू हुआ था STT?

भारत में STT की शुरुआत 1 अक्टूबर 2004 को की गई थी। इसका उद्देश्य टैक्स चोरी रोकना, इक्विटी और डेरिवेटिव ट्रेडिंग में पारदर्शिता लाना और टैक्स कलेक्शन को आसान बनाना था। हालांकि, 2018 के बजट में लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स दोबारा लागू कर दिया गया, लेकिन STT को हटाया नहीं गया।

क्यों परेशान हैं ट्रेडर्स?

बाजार एक्सपर्ट्स का मानना है कि STT बढ़ोतरी का असर खासतौर पर एक्टिव ट्रेडर्स पर पड़ेगा। पहले ही पिछले बजट में कैपिटल गेन टैक्स बढ़ाया गया था—LTCG को 10% से बढ़ाकर 12.5% और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) को 15% से 20% कर दिया गया। अब STT में बढ़ोतरी ने ट्रेडिंग की लागत और बढ़ा दी है।

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