मध्य पूर्व में एक बार फिर बढ़े तनाव का असर पूरी दुनिया के तेल बाजार पर देखने को मिला है। ईरान पर अमेरिकी हमले और हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास तीन जहाजों पर हुए हमलों के बाद कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेज उछाल आ गया। बुधवार को ब्रेंट क्रूड और अमेरिकी WTI क्रूड दोनों की कीमतें 3 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं। इस घटनाक्रम ने वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि हॉर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक माना जाता है।
ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 76.54 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड 72.72 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता दिखा। दोनों बेंचमार्क में करीब 3.2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे पहले हाल के दिनों में तेल की कीमतें युद्ध शुरू होने से पहले के स्तर तक नीचे आ गई थीं, लेकिन नए हमलों के बाद बाजार में फिर से अनिश्चितता बढ़ गई है।
हमले के बाद क्यों बढ़ी चिंता?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। अगर इस इलाके में हालात और बिगड़ते हैं तो दुनिया के कई देशों तक तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि निवेशकों ने तेल की खरीद बढ़ा दी, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला।
एशियाई शेयर बाजारों पर भी दिखा असर
तेल की कीमतों में तेजी और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर एशियाई शेयर बाजारों पर भी पड़ा। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे। हालांकि हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में बढ़त दर्ज की गई। निवेशक फिलहाल वैश्विक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं।
भारत पर क्या होगा असर?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल विदेशों से आयात करता है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर देश के आयात बिल, महंगाई और पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह देखना होगा कि मध्य पूर्व में तनाव आगे कितना बढ़ता है और तेल बाजार किस दिशा में जाता है।
यह भी पढ़ें- सऊदी अरब ने अचानक सस्ता किया कच्चा तेल! 20 साल की सबसे बड़ी कीमत कटौती के बाद भारत पर क्या पड़ेगा असर?
Latest Business News