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भारत सरकार से Elon Musk की स्टारलिंक पर कड़ी से कड़ी शर्तें लगाने की मांग, रिसर्च इंस्टीट्यूट ने कहा- कोई समझौता न किया जाए

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को डेटा फ्लो, नेटवर्क तक पहुंच और आपातकाल में सर्विस बंद करने की क्षमता पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहिए।

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Image Source : STARLINK Elon Musk की स्टारलिंक पर कड़ी शर्तें लगाने की मांग

भारत के एक रिसर्च इंस्टीट्यूट ने सरकार से विदेशी सैटेलाइट सर्विस प्रोवाइडरों पर कड़ी और ऐसी शर्तें लगाने का आग्रह किया है, जिनसे कोई समझौता न किया जाए। इंस्टीट्यूट का कहना है कि इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स की स्टारलिंक सर्विस अमेरिका को कम्यूनिकेशन इंफ्रा पर रणनीतिक बढ़त दे सकती है और भारत की प्रौद्योगिकी संप्रभुता को कमजोर कर सकती है।

जियो-पॉलिटिकल कंट्रोल का एक माध्यम बन सकता है स्टारलिंक

कूटनीति फाउंडेशन की नवंबर, 2024 में पब्लिश हुई और अक्टूबर, 2026 में अपडेट हुई रिपोर्ट में स्टारलिंक को स्पष्ट रूप से जियो-पॉलिटिकल कंट्रोल का एक माध्यम बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सैटेलाइट आधारित ब्रॉडबैंड अब सिर्फ एक सर्विस नहीं रह गई है, बल्कि ये मिलिट्री, खुफिया जानकारी जुटाने और भू-राजनीतिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण साधन बनता जा रहा है।

डेटा फ्लो, नेटवर्क तक पहुंच और आपातकाल में सर्विस बंद करने की क्षमता पर पूरा कंट्रोल जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत को डेटा फ्लो, नेटवर्क तक पहुंच और आपातकाल में सर्विस बंद करने की क्षमता पर अपना कंट्रोल बनाए रखना चाहिए। इसके साथ ही देश में अपना सैटेलाइट सिस्टम डेवलप करने की प्रक्रिया तेज करनी चाहिए। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थित उपग्रहों के जरिए इंटरनेट सर्विस देती है। ये सर्विस खास तौर पर उन दूरदराज के इलाकों के लिए उपयोगी है, जहां मोबाइल नेटवर्क और ब्रॉडबैंड केबल लगाना मुश्किल या महंगा है।

2021 से ही भारत में सर्विस शुरू करने को बेताब मस्क

बताते चलें कि इलॉन मस्क की कंपनी स्टारलिंक 2021 से ही भारत में सेवाएं शुरू करने की कोशिश कर रहा है। उसे जून, 2025 में प्रमुख लाइसेंस मिले थे और अगले महीने अंतरिक्ष नियामक भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) से अनुमति मिली थी। हालांकि, आखिरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन लंबित होने के कारण स्टारलिंक अभी तक भारत में अपनी सर्विस शुरू नहीं कर पाई है।

कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच कर रहे हैं अधिकारी

लंबित मुद्दों में सुरक्षा मंजूरी, विदेशी निवेश की अनुमति और स्पेक्ट्रम आवंटन की व्यवस्था शामिल हैं। अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या सैटेलाइट के बीच सीधे संपर्क की सुविधा के जरिए भारत का डेटा घरेलू गेटवे को दरकिनार कर बाहर भेजा जा सकता है। भारत में स्टारलिंक की सेवाएं शुरू होने में हो रही देरी की वजह से मस्क बौखलाए हुए हैं।

PTI Inputs

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