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सूखे मेवे से लेकर तेल तक, भारत ईरान से क्या खरीदता है? युद्ध जैसे हालात में आम आदमी को क्या हो सकती है परेशानी

ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया की धड़कनें तेज कर दी हैं। भारत भले ही इस संघर्ष का हिस्सा न हो, लेकिन वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति से जुड़ा होने के कारण इसका असर हमारी अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ सकता है।

भारत ईरान से क्या...- India TV Hindi
Image Source : CANVA भारत ईरान से क्या खरीदता है?

पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव केवल सीमा पर गोलियों की आवाज तक सीमित नहीं रहता, उसका असर हजारों किलोमीटर दूर भारत की रसोई और जेब तक पहुंच सकता है। ईरान और इजरायल के बीच हालिया सैन्य तनाव ने वैश्विक बाजार में अनिश्चितता बढ़ा दी है। भारत और ईरान के बीच दशकों पुराने व्यापारिक रिश्ते हैं, इसलिए वहां के हालात का सीधा या परोक्ष असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम आदमी पर पड़ सकता है।

भारत ईरान से क्या-क्या मंगाता है?

  1. सूखे मेवे: बादाम, पिस्ता, खजूर, किशमिश और अखरोट बड़ी मात्रा में ईरान से भारत आते हैं। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में इनकी मांग और बढ़ जाती है।
  2. केसर: दुनिया का बेहतरीन केसर ईरान में पैदा होता है। भारत इसके बड़े आयातकों में शामिल है।
  3. रसायन और खाद: खेती के लिए जरूरी उर्वरक और कुछ ऑर्गेनिक केमिकल्स भी ईरान से आयात किए जाते हैं।
  4. ताजे फल: सेब, कीवी और आलूबुखारा जैसे फल भी भारतीय बाजारों में ईरान से पहुंचते हैं।
  5. बिटुमेन और अन्य कच्चा माल: सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाला डामर (बिटुमेन), सल्फर और कुछ खनिज उत्पाद भी मंगाए जाते हैं।

असली चिंता: तेल और हॉर्मुज जलडमरूमध्य

ईरान की भौगोलिक स्थिति बेहद अहम है। वह होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित है। यह समुद्री रास्ता दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल की सप्लाई का मुख्य मार्ग है। भारत अपने कुल कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा सऊदी अरब, इराक और यूएई से मंगाता है, और यह तेल इसी रास्ते से होकर आता है। अगर तनाव बढ़ने पर इस मार्ग में रुकावट आती है, तो वैश्विक तेल कीमतों में तेज उछाल आ सकता है। भले ही भारत सीधे ईरान से तेल न खरीद रहा हो, लेकिन सप्लाई चेन बाधित होने से पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं।

आम आदमी की जेब पर संभावित असर

1. पेट्रोल-डीजल महंगा: तेल की कीमत बढ़ने से परिवहन खर्च बढ़ेगा, जिसका असर सब्जियों से लेकर रोजमर्रा के सामान तक पड़ेगा।

2. महंगे सूखे मेवे और फल: आयात प्रभावित होने पर बाजार में पिस्ता, बादाम और केसर के दाम बढ़ सकते हैं।

3. महंगाई का दबाव: फर्टिलाइजर और केमिकल्स की कीमत बढ़ने से खेती की लागत बढ़ सकती है, जिससे फूड ग्रेन्स महंगे हो सकते हैं।

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