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‘आज की कमाई नहीं, कल की ताकत भी देखिए’, विकसित भारत कैसे बनेगा... गौतम अदानी से सुनिए

अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी केयर एज रेटिंग्स इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने 'विकसित भारत' के विजन को साझा करते हुए कहा कि भारत को कम क्रेडिट स्टैंडर्ड्स की नहीं, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन करने के लिए 'व्यापक नजरिए' की जरूरत है।

gautam adani- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी।

मुंबई: भारत के सक्सेसफुल बिजनेसमैन गौतम अदानी ने विकसित भारत पर अपना विजन शेयर किया है। केयर एज रेटिंग्स इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम में गौतम अदानी बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए। उन्होंने 'विकसित भारत' के विजन को साझा करते हुए भारत के आर्थिक और बुनियादी ढांचे पर, नए भारत के सपनों पर अपनी बात रखी।

'भारत को कम मानक नहीं, बड़ा नजरिया चाहिए'

अदानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अदानी ने भारत की क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के जोखिम और उनकी आर्थिक उपयोगिता को आंकने के लिए व्यापक विश्लेषणात्मक ढांचा विकसित करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि पारंपरिक रेटिंग मॉडल कई बार उन बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की वास्तविक आर्थिक और रणनीतिक क्षमता को पूरी तरह नहीं आंक पाते, जो नए बाजार, उद्योग और पूरे इकोसिस्टम तैयार करते हैं। मुंबई में CareEdge Group के सालान समिट को संबोधित करते हुए अदानी ने कहा कि भारत को क्रेडिट मानकों को कम करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इंफ्रास्ट्रक्चर को देखने के लिए नजरिया व्यापक करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “भारत को कम मानकों की जरूरत नहीं है। भारत को व्यापक नजरिए की जरूरत है।”

Image Source : reporter inputकेयर एज रेटिंग्स इंफ्रास्ट्रक्चर लैंडस्केप कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट शामिल हुए गौतम अदानी।

इंफ्रास्ट्रक्चर को 3 श्रेणियों में बांटने का सुझाव

अदानी ने इंफ्रास्ट्रक्चर को तीन श्रेणियों में बांटते हुए कहा कि रिप्लेसमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए पारंपरिक रेटिंग मॉडल पर्याप्त हैं। वहीं, ग्रोथ इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में इकोसिस्टम से मिलने वाले फायदे को भी आकलन में शामिल किया जाना चाहिए। इसके अलावा उन्होंने ‘प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’ की बात की, जो नई क्षमताओं, बाजारों और औद्योगिक क्लस्टर्स को जन्म दे सकता है। उन्होंने मुंद्रा, विझिंजम और खावड़ा का उदाहरण देते हुए कहा कि ये प्लेटफॉर्म सिर्फ मौजूदा मांग को पूरा नहीं करते, बल्कि नई मांग, नए इकोसिस्टम और नई क्षमताएं पैदा करते हैं।

मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण देकर समझाया मॉडल

अदानी ने गुजरात के मुंद्रा पोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि जो परियोजना कई दशक पहले अपेक्षाकृत कम विकसित समुद्री तट पर एक पोर्ट के रूप में शुरू हुई थी, वह आगे चलकर रेल, लॉजिस्टिक्स सेंटर, बिजली उत्पादन और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा व्यापक औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बन गई। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोजेक्ट्स का मूल्यांकन केवल अलग-अलग संपत्ति के अनुमानित कैश फ्लो या स्टैंडअलोन डिस्काउंटेड-कैश-फ्लो मॉडल के आधार पर करना उनकी वास्तविक क्षमता को सीमित कर सकता है।

अदानी ने कहा, “अगर हम सिर्फ आज दिखाई देने वाली मांग के लिए निर्माण करेंगे, तो भारत हमेशा कल के अवसरों से पीछे रहेगा।”

Image Source : reporter inputCareEdge Group के सालान समिट में गौतम अदानी।

विझिंजम को लेकर भी उठाया सवाल

केरल के विझिंजम इंटरनेशनल सीपोर्ट का उदाहरण देते हुए अदानी ने कहा कि भारत लंबे समय तक ट्रांसशिपमेंट के लिए विदेशी हब पर निर्भर रहा, जबकि विझिंजम की स्थिति प्रमुख वैश्विक शिपिंग मार्गों के करीब है। अदानी के मुताबिक, पारंपरिक वित्तीय आकलन इस परियोजना के व्यापक रणनीतिक मूल्य को पूरी तरह पकड़ने में कठिनाई महसूस करते रहे। उन्होंने कहा, “विझिंजम बनाने में सबसे बड़ा जोखिम कभी नहीं था। सबसे बड़ा जोखिम यह था कि भारत यह मानता रहता कि वह ऐसा नहीं कर सकता।”

खावड़ा प्रोजेक्ट को AI और मैन्युफैक्चरिंग से जोड़ा

अदानी ने गुजरात के कच्छ क्षेत्र में खावड़ा में चल रहे रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इसे केवल बिजली उत्पादन की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। बड़े पैमाने पर स्वच्छ ऊर्जा भविष्य में डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और अन्य ऊर्जा-गहन उद्योगों का आधार बन सकती है। उन्होंने कहा, “AI सॉफ्टवेयर जैसा दिख सकता है लेकिन अंततः AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर चलता है। इसके लिए बिजली, डेटा सेंटर, कूलिंग, ट्रांसमिशन नेटवर्क और जमीन जैसी बुनियादी सुविधाओं की जरूरत होगी।

‘रेटिंग में ढील नहीं, नजरिया व्यापक करने की मांग’

अदानी ने स्पष्ट किया कि उनकी अपील रेटिंग में ढील देने या कमजोर परियोजनाओं को मंजूरी देने की नहीं है। उन्होंने कहा कि रेटिंग एजेंसियों को अपनी स्वतंत्रता और सख्त मानकों से समझौता नहीं करना चाहिए, बल्कि ऐसे डायनेमिक मॉडल तैयार करने चाहिए जो राष्ट्रीय स्तर के बड़े प्लेटफॉर्म्स की क्षमता को पहचान सकें। उनके मुताबिक नए क्रेडिट फ्रेमवर्क में पारंपरिक लेवरेज, कैश फ्लो और प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन रिस्क के साथ इकोसिस्टम मल्टीप्लायर, रणनीतिक मजबूती और भविष्य में जुड़ने वाली क्षमताओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।

भारत से दुनिया के लिए नया क्रेडिट फ्रेमवर्क बनाने की अपील

अदानी ने CareEdge से दुनिया का पहला व्यापक ‘क्रेडिट फ्रेमवर्क फॉर इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म इंफ्रास्ट्रक्चर’ विकसित करने की दिशा में नेतृत्व करने की अपील की। उन्होंने कहा कि ऐसा मॉडल दूसरे उभरते देशों के लिए भी उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर का असली मूल्य केवल उससे मिलने वाले वित्तीय रिटर्न में नहीं, बल्कि उस आर्थिक गतिविधि और राष्ट्रीय क्षमता में है, जिसे वह संभव बनाता है। अदानी ने कहा, “2047 का भारत सिर्फ महत्वाकांक्षा से नहीं बनेगा। यह तब बनेगा, जब महत्वाकांक्षा विश्वास हासिल करेगी, जब भरोसे से पूंजी मिलेगी और जब पूंजी से देश की क्षमता बढ़ेगी।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने एक कविता की कुछ पंक्तियां पढ़ीं। उन्होंने कहा, ''जहां हर भारतीय के सपनों को मिले ऊंची उड़ान, जहां आत्मविश्वास बने भारत की नई पहचान, जहां सामर्थ्य और संकल्प बढ़ाएं राष्ट्र का सम्मान, वही भारत बनेगा विकसित समर्थ और महान।''

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