भारत में सोना केवल गहना नहीं होता, बल्कि जरूरत के समय काम आने वाली बड़ी पूंजी भी माना जाता है। जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, तो लोग अपने सोने के आभूषण गिरवी रखकर बैंक या फाइनेंस कंपनियों से लोन ले लेते हैं। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में सिर्फ एक महीने में ही ₹24,061 करोड़ का गोल्ड लोन लिया गया। यह बढ़ोतरी हैरान करने वाली है और दिखाती है कि अब लोग जरूरत पड़ने पर तेजी से सोना गिरवी रखकर पैसा जुटा रहे हैं।
127.6% की सालाना छलांग
भारतीय रिजर्व बैंक की मासिक रिपोर्ट के मुताबिक, गोल्ड ज्वैलरी के बदले लिए जाने वाले लोन में सालाना आधार पर 127.6% की वृद्धि दर्ज की गई है। वित्तीय वर्ष के आधार पर भी 85.5% का उछाल दिखा है। 31 मार्च तक जहां गोल्ड लोन का बकाया ₹2,06,282 करोड़ था, वहीं नवंबर 2025 में यह ₹3,58,645 करोड़ और 31 दिसंबर 2025 तक बढ़कर ₹3,82,706 करोड़ हो गया। यह संकेत देता है कि गोल्ड लोन अब सीमित वर्ग का ऑप्शन नहीं, बल्कि व्यापक उपभोग वित्त का अहम हिस्सा बन चुका है।
क्यों बढ़ रहा है गोल्ड लोन का क्रेज?
इस तेजी के पीछे दो आसान वजहें हैं। पहली कि अगर आपके पास सोने के गहने हैं, तो बैंक या NBFC सिर्फ उसकी प्योरिटी जांचते हैं और जल्दी लोन दे देते हैं। ज्यादा कागजी काम नहीं करना पड़ता और CIBIL स्कोर की भी सख्त जांच नहीं होती। यानी पैसे जल्दी मिल जाते हैं। दूसरा, 2.5 लाख रुपये तक के छोटे गोल्ड लोन में गहनों की कीमत का 85% तक लोन मिल सकता है। इससे लोगों को ज्यादा रकम मिल जाती है। साथ ही, गोल्ड लोन की ब्याज दर पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के मुकाबले कम होती है, इसलिए यह सस्ता और सुविधाजनक ऑप्शन माना जाता है।
पर्सनल लोन से आगे निकलता ट्रेंड?
दिसंबर 2025 तक लोगों ने सोना गिरवी रखकर कुल मिलाकर 16.2 लाख करोड़ रुपये का लोन ले रखा है। यह रकम पर्सनल लोन (15.9 लाख करोड़ रुपये) से भी थोड़ी ज्यादा हो गई है। हालांकि घर खरीदने के लिए लिया जाने वाला होम लोन अब भी सबसे बड़ा हिस्सा है, जिसकी कुल राशि करीब 43 लाख करोड़ रुपये है। लेकिन खास बात यह है कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लिए जाने वाले कर्ज में गोल्ड लोन का हिस्सा तेजी से बढ़ा है। वित्त वर्ष 2024 की पहली तिमाही के बाद से उपभोग लोन में गोल्ड लोन की हिस्सेदारी दोगुनी हो चुकी है। मतलब साफ है कि अब लोग जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन की जगह तेजी से सोना गिरवी रखकर लोन लेना पसंद कर रहे हैं।
क्या यह फाइनेंशियल स्ट्रेस का संकेत?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि महंगाई, नकदी की जरूरत और आसान उपलब्धता ने गोल्ड लोन को इमरजेंसी फंड में बदल दिया है। हालांकि, तेजी से बढ़ता यह ट्रेंड इस बात का भी संकेत हो सकता है कि परिवार छोटी जरूरतों के लिए संपत्ति गिरवी रखने को मजबूर हो रहे हैं। आने वाले महीनों में यह देखना अहम होगा कि यह उछाल स्थायी प्रवृत्ति बनता है या अस्थायी दबाव का नतीजा है।
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