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SGB का धमाका! 1 लाख रुपये बन गए 4.29 लाख, जानें किस गोल्ड बॉन्ड ने कराया मालामाल

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने जिस सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) 2017-18 Series-IX की फाइनल रिडेम्प्शन डेट और कीमत की घोषणा की है, उसने निवेशकों को सचमुच मालामाल कर दिया है। यह वही सीरीज है जिसने 8 साल में ऐसा रिटर्न दिया जिसे देखकर पारंपरिक गोल्ड निवेश भी शर्मा जाएं।

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ने...- India TV Hindi
Image Source : CANVA सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड ने दिया जैकपॉट!

अगर आप सोचते हैं कि सोने में सिर्फ जेवर खरीदने से ही फायद होता है, तो यह खबर आपके नजरिये को पूरी तरह बदल देगी। सरकार की ओर से जारी किए जाने वाले सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सही जगह निवेश करने पर इतना बड़ा रिटर्न भी मिल सकता है कि आम निवेशक भी मालामाल हो जाए। 2017 में खरीदा गया एक SGB आज निवेशकों को करीब 329% का रिटर्न दे रहा है यानि 1 लाख रुपये का निवेश अब 4.29 लाख रुपये में बदल चुका है!

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने SGB 2017-18 सीरीज-IX का फाइनल रिडेम्प्शन डेट और रिडेम्प्शन प्राइस जारी कर दिया है। RBI के अनुसार, इस बॉन्ड की अंतिम रिडेम्प्शन तारीख 27 नवंबर 2025 तय की गई है। यह बॉन्ड 20 से 22 नवंबर 2017 के बीच सब्सक्रिप्शन के लिए खुला था और 27 नवंबर 2017 को सेटल हुआ था। चूंकि SGB की अवधि 8 वर्ष की होती है, इसलिए इसकी मैच्योरिटी डेट अब घोषित की गई है।

12,484 रुपये प्रति यूनिट का होगा अंतिम रिडेम्प्शन प्राइस

RBI ने बताया कि इस बॉन्ड का फाइनल रिडेम्प्शन प्राइस ₹12,484 प्रति इकाई होगा, जो 24, 25 और 26 नवंबर 2025 को सोने के औसत बंद भाव पर आधारित है। जब यह बॉन्ड जारी किया गया था, तब इसका इश्यू प्राइस 2964 रुपये प्रति ग्राम था। ऑनलाइन खरीद पर यह भाव 2914 रुपये पड़ा था। अब जब रिडेम्प्शन प्राइस 12,484 रुपये है, तो निवेशकों को प्रति यूनिट 9,570 रुपये का सीधा मुनाफा मिल रहा है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह करीब 328.41% का रिटर्न बनता है, वह भी सिर्फ कीमत बढ़ोतरी पर, अलग से मिलने वाला 2.5% वार्षिक ब्याज इसमें शामिल नहीं है।

SGB क्यों है निवेशकों की पहली पसंद?

SGB स्कीम सोना खरीदने का सबसे सुरक्षित और आसान तरीका माना जाता है। इसमें स्टोरेज का झंझट नहीं, शुद्धता की चिंता नहीं, 2.5% सालाना ब्याज, मैच्योरिटी पर टैक्स फ्री रिटर्न और 5 साल बाद प्रीमैच्योर रिडेम्प्शन की सुविधा। इतना ही नहीं, ये बॉन्ड ट्रेडेबल भी होते हैं और लोन के लिए कोलेट्रल के रूप में इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

निवेश में जोखिम क्या है?

SGB में सबसे बड़ा जोखिम केवल सोने के दाम गिरने का है। हालांकि, आरबीआई के अनुसार, सोने की यूनिट्स कम नहीं होतीं इसलिए लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए यह एक सुरक्षित ऑप्शन माना जाता है।

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