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I4C और CERT-In ने जारी की गंभीर चेतावनी, भारतीय बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर AI आधारित साइबर हमले का खतरा

इन हमलों में करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी के मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी पुराने और अपडेट नहीं किए गए सॉफ्टवेयर तथा इंटरनेट से जुड़े कमजोर सर्वर और IT सिस्टम को निशाना बनाते हैं।

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Image Source : PIXABAY बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर AI आधारित साइबर हमले का खतरा

I4C (इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर) और CERT-In (इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम) ने भारतीय बैंकों और फिनटेक कंपनियों पर AI आधारित साइबर हमले को लेकर गंभीर चेतावनी जारी की है। देश में होने वाले साइबर क्राइम पर काबू पाने के लिए काम करने वाली इन सरकारी एजेंसियों का कहना है कि AI एजेंट्स की मदद से बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों को निशाना बनाकर मशीन की स्पीड से साइबर अटैक किए जा रहे हैं। 

करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी के मामले आए सामने

एजेंसी ने बताया कि इन हमलों में करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी के मामले सामने आए हैं। साइबर अपराधी पुराने और अपडेट नहीं किए गए सॉफ्टवेयर तथा इंटरनेट से जुड़े कमजोर सर्वर और IT सिस्टम को निशाना बनाते हैं। एजेंसी के मुताबिक, ग्राहकों की शिकायतें प्राप्त करने वाले ऑनलाइन इंटरफेस भी हैकर्स के निशाने पर हैं। सिस्टम में सेंध लगाने के बाद हैकर्स ऑटोमेटेड फंड डिस्बर्समेंट सिस्टम और पेमेंट ट्रांसफर से जुड़े API को निशाना बनाते हैं। 

सभी बैंकों, NBFCs, फिनटेक कंपनियां, पेमेंट एग्रीगेटर और पेमेंट गेटवे को CERT-In की जारी दोनों Critical Cyber Security Advisories को प्राथमिकता से लागू करें।

  • 9 अक्टूबर, 2026 को जारी Advisory CIAD-2026-0046 में पेमेंट और डिस्बर्समेंट API के जरिए होने वाले साइबर हमलों को लेकर चेतावनी दी गई है। 
  • 15 अक्टूबर 2026 को जारी Advisory CIAD-2026-0049 में AI एजेंट्स को साइबर हमले के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किए जाने को लेकर आगाह किया गया है।

बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों के लिए जारी की गई गाइडलाइंस

  • सभी वित्तीय संस्थान अपने-अपने सेक्टर के रेगुलेटर द्वारा निर्धारित साइबर सुरक्षा नियमों का पालन करें।
  • किसी भी साइबर हमले की जानकारी मिलने के 6 घंटे के भीतर CERT-In को रिपोर्ट करना अनिवार्य है।
  • बैंक और NBFC को साइबर घटना की जानकारी मिलने के 6 घंटे के भीतर RBI के DAKSH पोर्टल पर भी रिपोर्ट करनी होगी।
  • साइबर हमलों से बचाव के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय/ पेमेंट और फंड ट्रांसफर में इस्तेमाल होने वाले सभी डिजिटल इंटरफेस और API की पूरी लिस्ट तैयार की जाए।
  • पुराने, इस्तेमाल में नहीं आने वाले और टेस्ट API को तत्काल बंद किया जाए।
  • बैंक के CISO (Chief Information Security Officer), IT टीम और ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग टीम के बीच बेहतर तालमेल हो।
  • हर ट्रांजैक्शन और प्रतिदिन होने वाले फंड ट्रांसफर की अधिकतम सीमा तय की जाए।
  • पैसे ट्रांसफर करने से पहले लाभार्थी के नाम और बैंक खाते का सत्यापन किया जाए।
  • असामान्य तेजी से होने वाले ट्रांजैक्शन पर विशेष निगरानी रखी जाए।
  • गैर-अधिकृत और Whitelisted नहीं किए गए IP एड्रेस से आने वाले एक्सेस टोकन फेलियर की जांच की जाए।
  • ग्राहकों की शिकायतें प्राप्त करने वाले ऑनलाइन सिस्टम और इंटरफेस की सुरक्षा मजबूत की जाए।
  • किसी भी साइबर हमले के जरिए एक सिस्टम से दूसरे सिस्टम तक पहुंच बनाने (Lateral Movement) की कोशिश को रोकने के लिए सिक्योरिटी आर्किटेक्चर की समीक्षा की जाए।
  • ट्रांजैक्शन की नैरेशन, लाभार्थियों की प्रोफाइल और ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में अचानक होने वाले बदलावों पर नजर रखी जाए।
  • KYC, अप्रूवल और अन्य जरूरी जांच पूरी हुए बिना किसी भी परिस्थिति में पैसा ट्रांसफर न होने दिया जाए।
  • मशीन की गति से होने वाले साइबर हमलों का मुकाबला करने के लिए अधिकृत Red Team Exercises आयोजित की जाएं।
  • ये जांचा जाए कि साइबर हमले की स्थिति में SOC (Security Operations Centre) और पेमेंट सिक्योरिटी सिस्टम कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देते हैं।

Agentic AI Framework की मदद से बेहद तेज गति से किए जाते हैं हमले

I4C और CERT-In के मुताबिक, ऐसे मामलों में साइबर अपराधी Agentic AI Framework की मदद से बेहद तेज गति से हमले करते हैं। इसमें पेमेंट और फंड ट्रांसफर सिस्टम के जरिए करोड़ों रुपये की अनधिकृत निकासी की जाती है। निकाली गई रकम को अलग-अलग बैंकों के म्यूल अकाउंट (अपराधियों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बैंक खाते) में ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद IMPS और NEFT के जरिए रकम को तेजी से दूसरे खातों में भेजा जाता है या निकाल लिया जाता है। साइबर अपराधी जांच से बचने के लिए डिजिटल रिकॉर्ड और सबूत मिटाने की कोशिश करते हैं।

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