भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय आर्थिक और रणनीतिक संबंधों में जल्द एक बड़ा मोड़ आ सकता है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) ने संकेत दिए हैं कि भारत और अमेरिका एक द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के बेहद करीब हैं। इसके साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजार की स्थिरता और भारत द्वारा रूसी तेल व गैस की खरीद पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और भौगोलिक वास्तविकताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की प्रगति पर बात करते हुए कहा कि हम इस समय भारत के साथ एक ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं और हम ऐसा करने के बहुत करीब हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह संभावित समझौता दोनों लोकतांत्रिक देशों के बीच आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने, निर्यात-आयात की बाधाओं को कम करने और सप्लाई चेन को अधिक लचीला बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।
रूसी तेल पर प्रतिबंधों में छूट और वैश्विक ऊर्जा संकट
रूसी क्रूड ऑयल और गैस पर लगाए गए प्रतिबंधों और उनमें दी गई छूट को लेकर मार्को रुबियो ने कहा कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर पड़ने वाले असर को देखते हुए अमेरिका को पिछले कुछ महीनों में कुछ प्रतिबंधों में ढील देनी पड़ी। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति जब राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में प्रतिबंधों से छूट देने का फैसला लेते हैं, तो कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार किया जाता है। इनमें भारत के साथ चल रही द्विपक्षीय व्यापार वार्ता और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े मुद्दे भी शामिल हैं। रुबियो के मुताबिक, हर देश की परिस्थितियां और ऊर्जा जरूरतें अलग-अलग होती हैं, इसलिए विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय इन सभी कारकों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है।
विदेश नीति और ऊर्जा सुरक्षा पर बात करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि हर देश की अपनी भौगोलिक और आर्थिक परिस्थितियां होती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने माना कि कई देशों के लिए वैकल्पिक स्रोतों से ऊर्जा हासिल करना आसान नहीं है और वे रातों-रात अपनी ऊर्जा आपूर्ति का पूरा ढांचा नहीं बदल सकते। ऐसे में विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय वैश्विक बाजार में ऊर्जा की आपूर्ति, कीमतों की स्थिरता और क्षेत्रीय परिस्थितियों के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। रुबियो के बयान से संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत के साथ ट्रेड डील को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहा है, जबकि रूसी तेल और ऊर्जा जरूरतों से जुड़े मुद्दों पर भी व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की जरूरत को स्वीकार कर रहा है।
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