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भारत का सबसे छोटा रेलवे स्टेशन कौन-सा है? नाम सिर्फ 2 अक्षरों का, पलक झपकते ही निकल जाता है प्लेटफॉर्म!

भारत में रेलवे नेटवर्क दुनिया के सबसे बड़े नेटवर्क में से एक है। यहां हजारों स्टेशन हैं, जिनके नाम भी अलग-अलग और अनोखे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे छोटा रेलवे स्टेशन कौन-सा है, जिसका नाम सिर्फ दो अक्षरों का है?

भारत का सबसे छोटा नाम...- India TV Hindi
Image Source : CANVA भारत का सबसे छोटा नाम वाला रेलवे स्टेशन

भारतीय रेलवे दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है, जहां हजारों स्टेशन और लाखों किलोमीटर की पटरियां बिछी हैं। हम अक्सर बड़े और भव्य स्टेशनों जैसे नई दिल्ली या मुंबई सीएसटी की चर्चा करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा रेलवे स्टेशन भी है जिसका नाम देश में सबसे छोटा है? जी हां, इस स्टेशन का नाम इतना छोटा है कि इसे बोलने में आपको एक सेकंड का समय भी नहीं लगेगा और ट्रेन की खिड़की से देखते ही यह स्टेशन पलक झपकते ही आपकी आंखों के सामने से ओझल हो जाएगा। आइए जानते हैं इस अनोखे स्टेशन के बारे में।

ओडिशा की गोद में बसा एक अनोखा रेलवे स्टेशन

भारत के सबसे छोटे नाम वाले रेलवे स्टेशन है इब (Ib)। यह अनोखा स्टेशन ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में स्थित है। हावड़ा-नागपुर-मुंबई लाइन पर पड़ने वाले इस स्टेशन का नाम पास से बहने वाली इब नदी के नाम पर रखा गया है। इस स्टेशन के नाम में अंग्रेजी के केवल दो अक्षर (I और B) आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय रेलवे के रिकॉर्ड में इससे छोटा नाम किसी और स्टेशन का नहीं है। हालांकि, गुजरात के आणंद जिले में स्थित ओड (Od) स्टेशन का नाम भी दो अक्षरों का ही है, लेकिन लोकप्रियता के मामले में इब रेलवे स्टेशन सबसे आगे रहता है।

Image Source : Indian Railwaysइब रेलवे स्टेशन

पलक झपकते ही निकल जाता है प्लेटफॉर्म?

इब रेलवे स्टेशन के बारे में कहा जाता है कि अगर आप ट्रेन में झपकी ले रहे हैं या मोबाइल में व्यस्त हैं, तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि स्टेशन कब आया और कब चला गया। यह स्टेशन का सबसे छोटा रेलवे स्टेशन भी है और यहां बहुत ही कम ट्रेनों का स्टॉपेज है। यहां आने वाले यात्री अक्सर इसके पीले रंग के छोटे से साइनबोर्ड के साथ फोटो खिंचवाना पसंद करते हैं, जिस पर बड़े-बड़े अक्षरों में सिर्फ 'IB' लिखा होता है।

इतिहास और वर्तमान स्थिति

इस स्टेशन का इतिहास काफी पुराना है। इसकी शुरुआत साल 1891 में बंगाल नागपुर रेलवे के दौरान हुई थी। शुरुआत में यहां केवल मालगाड़ियों का आवागमन होता था, लेकिन बाद में यहां पैसेंजर ट्रेनों का ठहराव भी शुरू हुआ। आज के डिजिटल दौर में, यह स्टेशन रेल प्रेमियों और व्लॉगर्स के लिए एक पसंदीदा चेक-इन स्पॉट बन गया है।

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