भारतीय रेलवे अब अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पारंपरिक ईंधन की जगह स्वच्छ ईंधन अपनाने की तैयारी कर रहा है। इस दिशा में रेलवे ने इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) के साथ एक बड़ा समझौता किया है। इसके तहत दिल्ली-एनसीआर के 22 रेलवे प्रतिष्ठानों में एलपीजी और डीजल की जगह पाइप से मिलने वाली प्राकृतिक गैस यानी PNG का इस्तेमाल किया जाएगा। कंपनी के मुताबिक, इस बदलाव से रोजाना करीब 500 किलो एलपीजी और 2,500 लीटर डीजल की खपत कम होगी। इससे रेलवे को ईंधन पर होने वाले खर्च को घटाने और प्रदूषण कम करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
आईजीएल और उत्तर रेलवे के दिल्ली मंडल के बीच हुए समझौते के तहत शुरुआत में रोजाना करीब 3,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस की सप्लाई की जाएगी। इस गैस का इस्तेमाल रेलवे की अलग-अलग सुविधाओं में किया जाएगा। इसमें मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री, अधिकारियों के रेस्ट हाउस, बेस किचन, रेलवे कर्मचारियों के रनिंग रूम और गार्ड व टिकट परीक्षकों के लिए बने लॉबी शामिल हैं। यह व्यवस्था दिल्ली, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर के रेलवे प्रतिष्ठानों में लागू की जाएगी।
इन 5 रेलवे स्टेशनों की लॉन्ड्री में होगा बदलाव
इस योजना के तहत पांच रेलवे स्टेशनों पर मौजूद मैकेनाइज्ड लॉन्ड्री के बॉयलर अब पीएनजी से चलेंगे। इनमें दिल्ली सराय रोहिल्ला, पुरानी दिल्ली, आनंद विहार टर्मिनल, हजरत निजामुद्दीन और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन शामिल हैं। अभी इन सुविधाओं में एलपीजी और डीजल का इस्तेमाल होता है। पीएनजी की सप्लाई शुरू होने के बाद इन पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम होगी। रेलवे को उम्मीद है कि इससे ऊर्जा खर्च में भी कमी आएगी।
आने वाले समय में बढ़ेगी गैस की खपत
आईजीएल के मुताबिक, शुरुआत में रोजाना 3,000 स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर गैस की सप्लाई होगी। आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 8,000 से 10,000 SCMD तक किया जा सकता है। इसके लिए पाइपलाइन नेटवर्क और गैस कनेक्टिविटी का विस्तार किया जाएगा। आईजीएल के चेयरमैन सुभंकर सेन ने कहा कि रेलवे के साथ यह साझेदारी एलपीजी की जगह प्राकृतिक गैस के इस्तेमाल को बढ़ावा देगी। इससे आयातित ईंधन पर निर्भरता और सरकारी सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिल सकती है।
रेलवे अस्पतालों और कॉलोनियों तक पहुंच सकती है पीएनजी
दिल्ली मंडल के रेल प्रबंधक पुष्पेश रमन त्रिपाठी के मुताबिक, पीएनजी के इस्तेमाल से रेलवे की ऊर्जा लागत कम करने में मदद मिलेगी। भविष्य में रेलवे अस्पतालों और कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनियों तक भी पीएनजी कनेक्शन पहुंचाने की योजना है। इस पहल से रेलवे के संस्थानों में गैस का इस्तेमाल बढ़ेगा। साथ ही सिलेंडर रखने और डीजल संभालने की जरूरत भी कम होगी। हालांकि, वास्तविक बचत गैस और दूसरे ईंधनों की कीमतों तथा इस्तेमाल पर निर्भर करेगी।
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