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ITR Filing 2026: फ्रीलांसर, ब्लॉगर और इनफ्लूएंसर्स के लिए ITR फाइलिंग से जुड़ी अहम जानकारी; जान लें वरना आ सकता है नोटिस!

देश में फ्रीलांसिंग, कंटेंट क्रिएशन और गिग वर्क तेजी से बढ़ रहे हैं। यूट्यूब, इंस्टाग्राम, ब्लॉगिंग और ऑनलाइन कंसल्टिंग से लाखों लोग कमाई कर रहे हैं। लेकिन आय के साथ टैक्स की जिम्मेदारी भी आती है।

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Image Source : CANVA फ्रीलांसर्स और इनफ्लूएंसर्स के लिए ITR फाइलिंग टिप्स

सोशल मीडिया, यूट्यूब, ब्लॉगिंग और फ्रीलांसिंग के जरिए कमाई करने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। लेकिन जितनी तेजी से इनकी कमाई बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से टैक्स नियमों का पालन करना भी जरूरी हो गया है। अगर आप फ्रीलांसर, कंटेंट क्रिएटर, यूट्यूबर या इनफ्लूएंसर हैं, तो ITR फाइल करते समय एक छोटी सी गलती भी आपको इनकम टैक्स विभाग के नोटिस तक पहुंचा सकती है। ऐसे में रिटर्न दाखिल करने से पहले कुछ जरूरी बातों को समझ लेना बेहद जरूरी है।

फ्रीलांसर और इनफ्लूएंसर्स की आमदनी अक्सर एक से ज्यादा सोर्स से होते हैं। इसमें ब्रांड डील, यूट्यूब एड रेवेन्यू, एफिलिएट मार्केटिंग, कंसल्टिंग, स्पॉन्सर्ड पोस्ट और डिजिटल कंटेंट से होने वाली कमाई शामिल है। इसलिए हर आय का सही रिकॉर्ड रखना जरूरी है।

सही ITR फॉर्म चुनना बेहद जरूरी

टैक्स एक्सपर्ट्स के अनुसार, ऐसे प्रोफेशनल्स को आमतौर पर ITR-3 या ITR-4 फॉर्म का इस्तेमाल करना चाहिए। साथ ही रिटर्न में प्रोफेशन का सही कोड दर्ज करना भी जरूरी है ताकि जीएसटी और अन्य रिकॉर्ड्स से कोई अंतर न रहे। यदि आपकी आय निर्धारित सीमा से ज्यादा है तो आपको एडवांस टैक्स जमा करना पड़ सकता है। वहीं, पात्र फ्रीलांसर और छोटे व्यवसायी सेक्शन 44ADA या 44AD के तहत प्रिजम्प्टिव टैक्सेशन स्कीम का लाभ ले सकते हैं, जिससे अकाउंट बुक्स बनाए रखने की जटिलता कम हो जाती है।

जीएसटी नियमों का पालन भी जरूरी

सिर्फ इनकम टैक्स ही नहीं, बल्कि जीएसटी नियमों का पालन करना भी जरूरी है। यदि आप प्रोफेशनल खर्चों को टैक्स में डिडक्शन के रूप में दिखाना चाहते हैं, तो उनके बिल और डॉक्यूमेंट्स सुरक्षित रखने होंगे।

26AS और AIS का मिलान जरूर करें

ITR फाइल करने से पहले Form 26AS और AIS में दर्ज जानकारी का मिलान करना जरूरी है। यदि किसी भुगतान या टीडीएस में अंतर दिखता है, तो पहले उसे सही कराना चाहिए।

फ्री में मिले प्रोडक्ट भी टैक्स के दायरे में

कई ब्रांड इनफ्लूएंसर्स को प्रमोशन के बदले मुफ्त प्रोडक्ट या सैंपल भेजते हैं। टैक्स नियमों के अनुसार इनकी बाजार कीमत भी आय मानी जा सकती है। इसलिए इन्हें नजरअंदाज करना भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है।

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