भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। संयुक्त राष्ट्र (UNCTAD) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 में भारत में आने वाला फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) 44 फीसदी बढ़कर 39 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बावजूद विदेशी कंपनियों का भारत पर भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। सरकार की नई पॉलिसी, मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस और इन्वेस्टमेंट के अनुकूल माहौल का असर अब साफ दिखाई देने लगा है।
दक्षिण एशिया में सबसे मजबूत निवेश केंद्र बना भारत
UNCTAD की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दक्षिण एशिया में कुल FDI बढ़कर 46 अरब डॉलर हो गया, जिसमें अकेले भारत का योगदान 39 अरब डॉलर रहा। इससे साफ है कि भारत इस क्षेत्र में विदेशी निवेशकों की पहली पसंद बनकर उभरा है।
सरकार की योजनाओं का मिला फायदा
रिपोर्ट में कहा गया है कि मेक इन इंडिया, प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम, स्टार्टअप इंडिया, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम और नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम जैसी सरकारी पहलों ने विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने में अहम भूमिका निभाई है। इन योजनाओं की मदद से इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग जैसे सेक्टर में निवेश बढ़ा है।
कुछ सेक्टरों में निवेश की रफ्तार हुई धीमी
हालांकि कुल FDI में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में ग्रीनफील्ड निवेश परियोजनाओं का मूल्य 111 अरब डॉलर से घटकर करीब 74 अरब डॉलर रह गया। खासकर मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नई परियोजनाओं का आकार पहले के मुकाबले छोटा देखने को मिला। इसकी वजह वैश्विक व्यापार अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां बताई गई हैं।
डिजिटल सेक्टर बना निवेश का नया इंजन
रिपोर्ट के अनुसार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश लगातार मजबूत बना हुआ है। अमेजॉन, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी वैश्विक कंपनियां भारत में बड़े डेटा सेंटर और डिजिटल प्रोजेक्ट्स पर निवेश कर रही हैं। इससे भारत डिजिटल इकोनॉमी के सेक्टर में भी तेजी से अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेश में यह बढ़ोतरी भारत की आर्थिक विकास दर, रोजगार सृजन, नई तकनीक और औद्योगिक विकास को मजबूत करेगी। यदि सरकार सुधारों की रफ्तार बनाए रखती है और वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे बड़े निवेश केंद्रों में और मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।
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