मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं। ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता बढ़ गई है। इस तनाव का सबसे बड़ा असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर हो सकता है। यह एक अहम समुद्री रास्ता है, जिसके जरिए भारत का अरबों डॉलर का सामान खाड़ी देशों तक पहुंचता है। अगर इस रास्ते में कोई रुकावट आती है, तो भारत के व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है।
विश्लेषणों के मुताबिक, भारत लगभग 47.6 अरब डॉलर यानी करीब 4.33 लाख करोड़ रुपये का नॉन-ऑयल सामान खाड़ी देशों को इसी समुद्री मार्ग से निर्यात करता है। यह देश के कुल नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट का करीब 13 फीसदी हिस्सा है। ऐसे में यदि इस रूट पर किसी भी तरह की रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारत के व्यापार संतुलन और उद्योगों पर पड़ सकता है।
ऊर्जा से आगे का संकट
अक्सर होर्मुज स्ट्रेट की चर्चा तेल आपूर्ति के संदर्भ में होती है, क्योंकि भारत के तीन बड़े क्रूड सप्लायर इसी रास्ते से तेल भेजते हैं। लेकिन मौजूदा संकट सिर्फ ऊर्जा सुरक्षा तक सीमित नहीं है। नॉन-ऑयल निर्यात (जो भारत की आर्थिक मजबूती का अहम स्तंभ है) भी खतरे में है। शिपिंग फ्लो में मामूली रुकावट भी माल ढुलाई की लागत बढ़ा सकती है और डिलीवरी में देरी करा सकती है।
किन देशों को जाता है सबसे ज्यादा माल?
भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार संयुक्त अरब अमीरात है, जहां करीब 28.5 अरब डॉलर का सामान भेजा जाता है। इसके बाद सऊदी अरब (11.7 अरब डॉलर), इराक, कुवैत, कतर और ईरान जैसे देश आते हैं। ये सभी बाजार रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं और समुद्री आपूर्ति पर अत्यधिक निर्भर हैं।
किन सेक्टर पर पड़ेगा असर?
इंजीनियरिंग गुड्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, खाद्य उत्पाद, केमिकल और निर्माण सामग्री जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकते हैं। ये उद्योग बिना रुके समुद्री लॉजिस्टिक्स पर निर्भर रहते हैं। यदि तनाव बढ़ता है, तो एशिया और यूरोप के बीच व्यापारिक मार्गों में बदलाव संभव है, जिससे भारत के निर्यात की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
क्यों अहम है होर्मुज?
ईरान और ओमान के बीच स्थित यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त कॉरिडोर में से एक है। यहां से हर दिन भारी मात्रा में ऊर्जा और मर्चेंडाइज ट्रेड गुजरता है। इसलिए क्षेत्र में बढ़ती अस्थिरता केवल स्थानीय नहीं, बल्कि वैश्विक आर्थिक चिंता का विषय बन चुकी है।
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