देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एक बार फिर ऐसा फैसला लिया है, जिसने कॉर्पोरेट जगत में चर्चा तेज कर दी है। भारत के दूसरे सबसे अमीर कारोबारी मुकेश अंबानी ने लगातार छठे साल भी कंपनी से ₹1 तक की सैलरी नहीं ली। रिलायंस इंडस्ट्रीज की ताजा एनुअल रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भी उन्होंने वेतन, भत्ते, बोनस और रिटायरमेंट बेनिफिट्स समेत किसी भी तरह का भुगतान लेने से इनकार कर दिया।
मुकेश अंबानी ने जून 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी पूरी सैलरी छोड़ने का फैसला लिया था। उस समय देश की अर्थव्यवस्था और उद्योगों पर महामारी का बड़ा असर पड़ा था। इसी को देखते हुए उन्होंने कहा था कि जब तक कंपनी और उसके कारोबार पूरी क्षमता से पटरी पर नहीं लौटते, तब तक वह कोई वेतन नहीं लेंगे।
दिलचस्प बात यह है कि महामारी खत्म होने और रिलायंस के रिकॉर्ड मुनाफे के बावजूद उन्होंने अपना यह फैसला जारी रखा है। इससे पहले 2008-09 से लेकर 2019-20 तक उन्होंने अपनी सालाना सैलरी ₹15 करोड़ पर सीमित रखी थी, जबकि उस दौरान कई बड़ी कंपनियों के सीईओ करोड़ों रुपये का पैकेज ले रहे थे।
फिर कमाई कैसे करते हैं मुकेश अंबानी?
हालांकि मुकेश अंबानी सैलरी नहीं लेते, लेकिन उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा डिविडेंड से आता है। उनके पास रिलायंस इंडस्ट्रीज के करोड़ों शेयर हैं। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी द्वारा घोषित ₹6 प्रति शेयर डिविडेंड के आधार पर उन्हें सीधे तौर पर करीब ₹9.66 करोड़ की डिविडेंड आय हुई। इसके अलावा प्रमोटर ग्रुप की कंपनियों के जरिए उनके परिवार की हिस्सेदारी भी काफी बड़ी है। रिलायंस में प्रमोटर ग्रुप की कुल हिस्सेदारी 50% से ज्यादा है, जिससे हजारों करोड़ रुपये का डिविडेंड मिलता है।
रिकॉर्ड मुनाफे में चल रही रिलायंस
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने वित्त वर्ष 2025-26 में ₹95,754 करोड़ का रिकॉर्ड नेट प्रॉफिट दर्ज किया। वहीं कंपनी का मार्केट कैप भी 18 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच गया। इसके बावजूद मुकेश अंबानी का बिना सैलरी काम करना कॉर्पोरेट दुनिया में अलग उदाहरण माना जा रहा है।
बच्चों को भी नहीं मिलती बड़ी सैलरी
मुकेश अंबानी के बच्चों ईशा अंबानी, आकाश अंबानी और अनंत अंबानी भी कंपनी बोर्ड में शामिल हैं। हालांकि ईशा और आकाश को केवल सिटिंग फीस और कमीशन दिया गया, जबकि अनंत अंबानी को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बनने के बाद वेतन मिला।
क्यों खास है अंबानी का फैसला?
आज के दौर में जहां बड़ी कंपनियों के टॉप अधिकारी भारी-भरकम पैकेज लेते हैं, वहीं मुकेश अंबानी का लगातार छह साल तक बिना वेतन काम करना निवेशकों और कॉर्पोरेट गवर्नेंस विशेषज्ञों के लिए एक मिसाल माना जा रहा है। यही वजह है कि उनका यह फैसला फिर चर्चा में है।
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