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म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स के लिए गेम चेंजर साबित होंगे SEBI के नए TER नियम, जानिए कैसे

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। SEBI ने म्यूचुअल फंड्स के टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) यानी कुल खर्च अनुपात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है।

SEBI- India TV Hindi
Image Source : ANI SEBI ने म्यूचुअल फंड के Total Expense Ratio (TER) से जुड़े नियमों में बदलाव प्रस्तावित किया है।

म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए बड़ी खबर आई है। मार्केट रेगुलेटर SEBI ने मंगलवार को म्यूचुअल फंड के टोटल एक्सपेंस रेश्यो (TER) यानी कुल खर्च अनुपात से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। यह बदलाव निवेशकों के लिए बेहद अहम माने जा रहे हैं क्योंकि इससे फंड हाउस के चार्ज कम होंगे और निवेशकों के रिटर्न पर पॉजिटिव असर पड़ेगा।

दरअसल, सेबी ने म्यूचुअल फंड्स के खर्च ढांचे को पारदर्शी, सरल और इन्वेस्टर-फ्रेंडली बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। नए नियमों के तहत, फंड हाउस अब एक्स्ट्रा 5 बेसिस पॉइंट (bps) तक चार्ज नहीं ले पाएंगे, जो पहले उन्हें अस्थायी रूप से लेने की अनुमति थी। यह बदलाव सीधे तौर पर यूनिट होल्डर्स के खर्च को घटाने और रिटर्न बढ़ाने में मदद करेगा।

सेबी का नया प्रस्ताव

सेबी के नए प्रस्ताव में कहा गया है कि म्यूचुअल फंड्स से जुड़े सभी सांविधिक टैक्स और फीस जैसे STT, GST, CTT और स्टाम्प ड्यूटी को TER लिमिट से बाहर रखा जाएगा, जिससे इन्वेस्टर्स को इन चार्जेस का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। साथ ही, फंड हाउस द्वारा लिए जाने वाले ब्रोकरेज और ट्रांजैक्शन चार्जेज पर भी सख्त नियम लागू होंगे। अब इनकी सीमा घटाकर कैश मार्केट के लिए 12 bps से 2 bps और डेरिवेटिव्स के लिए 5 bps से 1 bps कर दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बदलाव पारदर्शिता को बढ़ावा देगा और निवेशकों को दोहरी फीस चुकाने से बचाएगा। अब तक कई फंड हाउस रिसर्च और अन्य सेवाओं के नाम पर एक्स्ट्रा शुल्क वसूलते थे, जिससे इन्वेस्टर अनजाने में ज्यादा भुगतान कर रहे थे।

नए नियम से क्या होगा?

नए नियमों के तहत अब म्यूचुअल फंड कंपनियां अपनी परफॉर्मेंस (प्रदर्शन) के आधार पर खर्च का प्रतिशत यानी एक्सपेंस रेशियो (TER) तय कर सकेंगी, लेकिन यह जरूरी नहीं होगा, बल्कि उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा। इसके अलावा, सेबी ने साफ कहा है कि जब कोई नई स्कीम लॉन्च की जाएगी, तो उससे जुड़ा सारा खर्च (जैसे विज्ञापन, प्रमोशन या लॉन्च की तैयारी) निवेशकों से नहीं वसूला जाएगा, बल्कि यह खर्च फंड हाउस या ट्रस्टी को खुद उठाना होगा। कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के फाउंडर दीपक शेनॉय ने कहा कि सेबी का यह कदम निवेशकों के लिए बहुत फायदेमंद है। अब फंड कंपनियों को अपने ट्रांजैक्शन चार्ज कम करने होंगे। इसका फायदा लंबे समय में निवेशकों को मिलेगा क्योंकि इससे उनके रिटर्न पर सीधा असर पड़ेगा और वे ज्यादा कमाई कर सकेंगे।

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