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Union Budget 2026: टैक्स स्लैब बदलेंगे या बढ़ेगी छूट की सीमा? टैक्सपेयर्स की नजरें निर्मला सीतारमण पर टिकीं

यूनियन बजट 2026 से पहले देशभर के टैक्सपेयर्स की नजरें वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण पर टिकी हुई हैं। 1 फरवरी को पेश होने वाले इस बजट से एक बार फिर उम्मीद की जा रही है कि सरकार आम आदमी को टैक्स के मोर्चे पर राहत दे सकती है।

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Image Source : POSTED ON X BY @NSITHARAMAN टैक्सपेयर्स की निर्मला सीतारमण से क्या उम्मीद?

टैक्सपेयर्स के लिए फरवरी का महीना हमेशा से खास रहा है, लेकिन इस बार उत्सुकता कुछ ज्यादा ही है। वजह है यूनियन बजट 2026। 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जब संसद में बजट पेश करेंगी, तो देश के करोड़ों नौकरीपेशा और मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स की नजरें उन्हीं पर टिकी होंगी। सवाल यही है कि क्या इस बार टैक्स स्लैब में फिर बदलाव होगा या फिर छूट की सीमा बढ़ाकर सरकार एक और बड़ा तोहफा देगी?

नई टैक्स रिजीम पर सरकार का फोकस

पिछले कुछ वर्षों से वित्त मंत्री का जोर इनकम टैक्स सिस्टम को आसान और पारदर्शी बनाने पर रहा है। यूनियन बजट 2020 में सरकार ने नई टैक्स रिजीम की शुरुआत की थी, जिसमें कम टैक्स रेट्स के बदले डिडक्शंस और एग्जेम्प्शंस छोड़ने का विकल्प दिया गया। इसका मकसद उन टैक्सपेयर्स को राहत देना था, जो निवेश के जरिए टैक्स बचाने की जटिल प्रक्रिया से गुजरना नहीं चाहते थे। सरकार ने समय-समय पर नई रिजीम को ज्यादा अट्रैक्टिव बनाने की कोशिश भी की। इसी दिशा में यूनियन बजट 2025 को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया।

बजट 2025 में मिला था बड़ा तोहफा

पिछले साल के बजट में वित्त मंत्री ने नई टैक्स रिजीम के तहत सालाना 12 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने का ऐलान किया था। इसके अलावा, टैक्स स्लैब में बदलाव कर बेसिक एग्जेम्प्शन लिमिट को 4 लाख रुपये तक बढ़ाया गया। नौकरीपेशा लोगों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन पहले ही 75,000 रुपये किया जा चुका है, जिससे सैलरी क्लास को सीधी राहत मिली।

1 अप्रैल से लागू होगा नया इनकम टैक्स एक्ट

बजट 2026 से पहले एक और बड़ा बदलाव सामने है। इनकम टैक्स एक्ट, 2025 1 अप्रैल से लागू होने जा रहा है, जो दशकों पुराने इनकम टैक्स एक्ट, 1961 की जगह लेगा। हालांकि इसमें टैक्स रेट्स या स्लैब में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है, लेकिन नियमों की भाषा को सरल और समझने योग्य बनाने पर खास जोर दिया गया है।

टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन हो सकता है बजट का फोकस

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बार बजट में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन को और यूजर-फ्रेंडली बनाने पर ध्यान दिया जा सकता है। रिटर्न प्रोसेसिंग को तेज करना, रिफंड में देरी खत्म करना और टैक्स विवादों के निपटारे के लिए नई स्कीम लाना सरकार की प्रायोरिटी हो सकती है। इससे न सिर्फ टैक्सपेयर्स को राहत मिलेगी, बल्कि कंप्लायंस बढ़ने से सरकार के राजस्व में भी इजाफा होगा।

क्या नई रिजीम में मिलेंगी डिडक्शंस?

टैक्स जानकारों की राय है कि सरकार नई टैक्स रिजीम में कुछ अहम डिडक्शंस जोड़ सकती है। टर्म लाइफ इंश्योरेंस, हेल्थ इंश्योरेंस और होम लोन के ब्याज पर छूट जैसी सुविधाएं अगर नई रिजीम में शामिल होती हैं, तो इससे टैक्सपेयर्स का झुकाव इस सिस्टम की ओर और बढ़ सकता है।

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