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पकी-पकाई फसल पर फिरा पानी! बेमौसम बारिश ने 2.49 लाख हेक्टेयर में मचाई तबाही, गेहूं को सबसे ज्यादा नुकसान

देशभर में बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। खेतों में तैयार खड़ी रबी फसलें भारी नुकसान की चपेट में आ गई हैं। केंद्र सरकार के मुताबिक अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में फसलें प्रभावित हुई हैं, जिसमें सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं को हुआ है।

बारिश के फसलें खराब...- India TV Hindi
Image Source : ANI बारिश के फसलें खराब (सांकेतिक तस्वीर)

देश के किसानों के लिए एक बार फिर चिंता बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। अप्रैल के पहले हफ्ते में हुई बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अब तक करीब 2.49 लाख हेक्टेयर में फसल बर्बाद हो चुकी है, जिसमें सबसे ज्यादा असर गेहूं की फसल पर पड़ा है। इस नुकसान ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है और आने वाले समय में फूड उत्पादन पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा मार

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के मुताबिक, इस बार बेमौसम बारिश का सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं को हुआ है। इसके अलावा बागवानी फसलें जैसे आम और लीची भी प्रभावित हुई हैं। कई राज्यों में कटाई के लिए तैयार फसल अचानक आई बारिश और ओलावृष्टि से खराब हो गई, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

कई राज्यों में बारिश और ओलावृष्टि का असर

भारत मौसम विभाग के अनुसार, 2 से 8 अप्रैल के बीच देश के कई हिस्सों में भारी बारिश हुई। इसमें उत्तर-पूर्व, मध्य, दक्षिण और उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्य शामिल हैं। मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने फसलों को नुकसान पहुंचाया।

अभी और बढ़ सकता है नुकसान

मौसम विभाग ने 9 से 15 अप्रैल के बीच भी बारिश का अनुमान जताया है। इसकी वजह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और अलग-अलग क्षेत्रों में बने साइक्लोनिक सिस्टम बताए जा रहे हैं। अगर यह सिलसिला जारी रहता है, तो फसलों को और नुकसान हो सकता है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ जाएगी।

सरकार ने दिया भरोसा

कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि सरकार इस संकट की घड़ी में किसानों के साथ खड़ी है। फसल नुकसान का आकलन करने के लिए तीन विभागों द्वारा सर्वे किया जा रहा है और राज्यों के साथ मिलकर राहत उपायों पर काम किया जा रहा है।

खरीफ की तैयारी पर भी असर

जून से शुरू होने वाली खरीफ बुवाई को लेकर भी सरकार सतर्क है। उर्वरकों की सप्लाई सुनिश्चित करने और कीमतों में स्थिरता बनाए रखने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने फॉस्फेटिक और पोटाश उर्वरकों पर सब्सिडी बढ़ाकर 41,534 करोड़ रुपये कर दी है, ताकि किसानों पर ज्यादा बोझ न पड़े।

आगे की चुनौती

भारत में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या अधिक है, जहां औसत जमीन करीब 0.9 हेक्टेयर है। ऐसे में बार-बार होने वाली मौसम की मार उनके लिए बड़ी चुनौती बन जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेती में विविधता लाने और नई तकनीकों को अपनाने से ही इस तरह के खतरे को कम किया जा सकता है।

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