देश में वीवीआईपी उड़ानों की सुरक्षा को लेकर अब बड़ा कदम उठाया गया है। हाल ही में हुई विमान दुर्घटनाओं और चुनावी दौर में बढ़ती हवाई गतिविधियों को देखते हुए नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन गाइडलाइंस का मकसद मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्यपाल जैसे वीवीआईपी यात्रियों की उड़ानों को और सुरक्षित बनाना है।
DGCA के मुताबिक, पहले हुए कई हादसों और घटनाओं के विश्लेषण में यह सामने आया है कि अस्थायी हेलीपैड या छोटे एयरस्ट्रिप्स से उड़ान भरते समय नियमों का सही तरीके से पालन नहीं किया गया। खासकर चुनाव के दौरान वीवीआईपी उड़ानों में सुरक्षा मानकों में लापरवाही देखी गई, जिससे जोखिम बढ़ गया।
किन पर लागू होंगे ये नियम?
ये नए गाइडलाइंस खास तौर पर नॉन-शेड्यूल्ड एयरक्राफ्ट और हेलीकॉप्टर ऑपरेटर्स पर लागू होंगे, जो वीवीआईपी यात्रियों को ले जाते हैं। यानी चार्टर्ड फ्लाइट्स और निजी हेलीकॉप्टर सेवाओं को अब ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी।
क्या हैं नए सख्त दिशा-निर्देश?
DGCA ने साफ किया है कि अब वीवीआईपी उड़ानों के लिए हर स्तर पर सुरक्षा को प्रायोरिटी देनी होगी। उड़ान से पहले एयरक्राफ्ट की सख्त जांच अनिवार्य होगी। पायलट और क्रू को सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करना होगा। अस्थायी हेलीपैड और एयरस्ट्रिप्स की स्थिति का पहले से मूल्यांकन किया जाएगा।खराब मौसम या जोखिम भरी परिस्थितियों में उड़ान से बचने की सलाह दी गई है।
हादसों से मिली सीख
हाल के समय में हुई दुर्घटनाओं ने यह दिखाया कि छोटी सी चूक भी बड़ा हादसा बन सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए DGCA ने स्पष्ट किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं होगा।
सुरक्षा पर सरकार का फोकस
DGCA का कहना है कि वीवीआईपी उड़ानों में जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। सभी संबंधित एजेंसियों और ऑपरेटर्स को मिलकर काम करना होगा ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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