आज के समय में UPI सिर्फ पेमेंट का जरिया नहीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, रेस्टोरेंट का बिल चुकाने और किराया भेजने तक, लोग कुछ ही सेकंड में फोनपे, गूगल-पे, पेटीएम या किसी अन्य UPI ऐप के जरिए भुगतान कर देते हैं। लेकिन अगर पेमेंट ₹2,000 से ऊपर हो जाए तो क्या अब UPI के लिए जेब ढीली करनी पड़ेगी? सोमवार को सरकार द्वारा जारी किए गए एक गजट नोटिफिकेशन के बाद से लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं। आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
वित्त मंत्रालय ने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट के तहत नया नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके अनुसार, बैंक और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (जैसे PhonePe, Google Pay) ₹2,000 तक के यूपीआई और RuPay डेबिट कार्ड ट्रांजैक्शन पर कोई भी चार्ज नहीं लगा सकते हैं। यानी ₹2,000 तक के पेमेंट पूरी तरह से कानूनी रूप से 'फ्री' रहेंगे।
₹2,000 से ज्यादा का UPI ट्रांसफर करने पर चार्ज लगेगा?
₹2000 से ज्यादा के कुछ चुनिंदा मर्चेंट पेमेंट पर चार्ज लगेगा है। मंगलवार को NPCI ने UPI के लिए संशोधित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा P2M यानी मर्चेंट पेमेंट पर लागू होगा। हालांकि, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांजैक्शन पर किसी भी राशि के लिए कोई शुल्क नहीं लगेगा।
क्या ₹10 की चाय या ₹500 के ग्रॉसरी बिल पर कोई फर्क पड़ेगा?
जी नहीं, कोई फर्क नहीं पड़ेगा। छोटे मूल्य वाले ट्रांजैक्शन (जैसे ₹10 की चाय, ₹280 का लंच या ₹1,500 की खरीदारी) पूरी तरह से ₹2,000 के सुरक्षित दायरे में आते हैं। इन पर भविष्य में भी कोई चार्ज नहीं लगाया जा सकता।
UPI से घर का रेंट देने पर पैसे कटेंगे?
नहीं। पर्सन-टू-पर्सन (P2P) यानी एक सामान्य बैंक खाते से दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में किए जाने वाले पैसे के ट्रांसफर हमेशा की तरह पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। यह नियम मुख्य रूप से व्यावसायिक लेन-देन से जुड़ा है, सामान्य घरेलू पैसों के लेनदेन से नहीं।
MDR क्या है और इससे ग्राहक कैसे प्रभावित हो सकते हैं?
एमडीआर (MDR) वह प्रोसेसिंग फीस होती है जो बैंक या डिजिटल पेमेंट कंपनियां किसी व्यापारी से पेमेंट स्वीकार करने के बदले वसूलती हैं। सरकार ने आम जनता पर कोई डायरेक्ट शुल्क नहीं लगाया है। लेकिन अगर भविष्य में बड़े पेमेंट्स पर दुकानदारों से MDR लिया जाता है, तो कुछ व्यापारी उस लागत की भरपाई करने के लिए ग्राहकों से मामूली एक्स्ट्रा चार्ज वसूलने की कोशिश कर सकते हैं, जैसा कि कुछ जगहों पर क्रेडिट कार्ड पेमेंट पर देखा जाता है।
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