भारतीय शेयर बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है और गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। मंगलवार को भी बाजार में बिकवाली का दौर जारी रहा, जिससे मुख्य सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी छह महीने के निचले स्तर के बेहद करीब पहुंच गए। पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी ने बाजार की धारणा को कमजोर कर दिया। कारोबार के अंत में बैंकिंग, फाइनेंस और आईटी (IT) सेक्टर के बड़े शेयरों में गिरावट ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।
मंगलवार के कारोबारी सत्र के समापन पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 242.65 अंक यानी 0.33% टूटकर 72,529.07 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28% फिसलकर 22,716.20 पर आ गया। केवल दिग्गज शेयर ही नहीं, बल्कि स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 1.02% और निफ्टी मिडकैप 100 में 0.95% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई।
गिरावट के पीछे के मुख्य कारण क्या?
बाजार में इस सुस्ती और बिकवाली के पीछे दो मुख्य वजहें हावी रहीं:
- कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें: वैश्विक बाजार में ब्रांड क्रूड 1.74% बढ़कर 107.1 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने, आयात बिल में इजाफा होने और कंपनियों के मार्जिन पर बुरा असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।
- विदेशी फंड्स की निकासी: वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने लगातार भारतीय बाजार से पैसे निकाले हैं, जिससे शेयरों पर दबाव बना हुआ है।
टॉप लूजर्स और गेनर्स स्टॉक्स
निफ्टी क्लोजिंग आंकड़ों के अनुसार, आईटी और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स शेयरों में सबसे तेज बिकवाली देखने को मिली। टाइटन (-3.00%), विप्रो (-2.95%), एचसीएल टेक (-2.44%), टेक महिंद्रा (-2.06%), टीसीएस (-1.85%) और अल्ट्राटेक सीमेंट (-1.78%) भारी गिरावट के साथ बंद हुए। रिलायंस इंडस्ट्रीज (-1.30%) और आईसीआईसीआई बैंक (-0.75%) में भी सुस्ती रही। इसकी विपरीत, अडानी एंटरप्राइजेज (+5.01%), अडानी पोर्ट्स (+4.49%), डॉ. रेड्डीज (+2.53%), सन फार्मा (+1.47%), इंफोसिस (+1.22%) और कोटक बैंक (+1.11%) हरे निशान में मजबूत होकर बंद हुए।
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