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शेयर बाजार में हाहाकार, सेंसेक्स 777 अंक टूटा तो निफ्टी 23,100 के करीब बंद; HCL-Infosys ने बचाई लाज

महंगे कच्चे तेल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के चलते भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 777 अंक तक फिसल गया। हालांकि, IT शेयरों में खरीदारी ने गिरावट को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की।

शेयर बाजार में बड़ी...- India TV Hindi
Image Source : ANI/CANVA शेयर बाजार में बड़ी गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार बिकवाली देखने को मिली। दिनभर के कारोबार में सेंसेक्स 777 अंक फिसल गया, जबकि निफ्टी भी 23,100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब आ गया। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। हालांकि, IT शेयरों की मजबूती ने बाजार की गिरावट को कुछ हद तक संभालने का काम किया।

कारोबार के अंत में सेंसेक्स 777.94 अंक यानी 1.04% गिरकर 74,003.82 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी 279.50 अंक यानी 1.19% टूटकर 23,118.60 पर रहा। बाजार में गिरावट की चौड़ाई भी काफी ज्यादा रही। करीब 1,070 शेयर बढ़े, जबकि 3,054 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए और 134 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

HCL-इन्फोसिस समेत IT शेयरों ने संभाला मोर्चा

बाजार में एकमात्र बड़ी राहत IT सेक्टर से मिली। HCL टेक्नोलॉजीज करीब 5% चढ़ा, जबकि टीसीएस, इन्फोसिस और टेक महिंद्रा में करीब 3-4% की तेजी रही। इसके चलते निफ्टी IT इंडेक्स लगभग 3% मजबूत हुआ। HDFC बैंक भी करीब 1.4% चढ़ा। बैंक ने MD और CEO पद के लिए RBI को दो नाम भेजे हैं, जिसके बाद शेयर में तेजी देखने को मिली।

बैंकिंग और फाइनेंस शेयरों पर दबाव

दूसरी ओर, बैंकिंग और वित्तीय कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। श्रीराम फाइनेंस, बजाज फिनसर्व, बजाज फाइनेंस और आईसीआईसीआई बैंक करीब 2-3.5% तक टूटे। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स करीब 4% गिरकर Nifty 50 का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा। सेक्टोरल इंडेक्स में भी सिर्फ IT और FMCG बढ़त में रहे। रियल एस्टेट, ऑटो, कंज्यूमर ड्यूरेबल, एनर्जी, मेटल और मीडिया समेत कई सेक्टरों में गिरावट रही। निफ्टी इंडिया डिफेंस इंडेक्स भी करीब 5% टूट गया।

कच्चा तेल और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाई चिंता

बाजार में गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में तेजी रही। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने से एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। भारत तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए महंगा कच्चा तेल महंगाई और अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा सकता है। इसके अलावा अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 5% के अहम स्तर तक पहुंच गई। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी से निवेशकों के बीच ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी और इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी दिखाई दिया।

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