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सातवें दिन करें इस विधि के साथ गणेश विसर्जन, जानें शुभ चौघड़िया मुहूर्त और नियम

20 सितंबर को गणेश उत्सव का 7वां दिन रहेगा। अगर आपने सात दिन के लिए बप्पा की प्रतिमा को अपने घर में विराजमान किया है तो रविवार को गणेश विसर्जन कर सकते हैं। तो यहां जानिए नियम और मुहूर्त।

गणेश विसर्जन 2026- India TV Hindi
Image Source : PEXELS गणेश विसर्जन 2026

गणेश उत्सव का प्रारंभ चतुर्थी तिथि से होता है और इसका समापन चतुर्दशी तिथि के दिन होता है। गणेशोत्सव भाद्रपद माह में दस दिनों तक मनाया जाता है। उत्सव का अंतिम दिन गणेश विसर्जन के नाम से प्रचलित है। गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालु गणपति जी की प्रतिमा विराजमान करते हैं। इसके बाद अपनी मन्नत और क्षमतानुसार के अनुसार, 1.5, 3, 5, 7 या 10 दिन गणेश विसर्जन करते हैं। अगर आपने अपने घर में 7 दिन के लिए गणेश जी की मूर्ति बैठाया है तो विसर्जन 20 सितंबर 2026, रविवार को किया जाएगा। बता दें कि हिंदू धर्म में देवी-देवताओं की पूजा विधि का समापन विसर्जन या उद्यापन के साथ ही होता है। तो आइए यहां जानिए चौघड़िया मुहूर्त, विधि और नियम के बारे में। 

गणेश विसर्जन के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 07:58 ए एम से 12:32 पी एम
  • अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 02:03 पी एम से 03:34 पी एम
  • सायाह्न मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 06:37 पी एम से 11:03 पी एम
  • रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 02:01 ए एम से 03:29 ए एम, सितंबर 21
  • उषाकाल मुहूर्त (शुभ) - 04:58 ए एम से 06:27 ए एम, सितंबर 21

7वें दिन गणेश विसर्जन 2026 का शुभ मुहूर्त 

7वें दिन गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त सुबह  7 बजकर 42 मिनट से दोपहर 12 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरा मुहूर्त दोपहर 1 बजकर 47 मिनट से 3 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। तीसरा मुहूर्त शाम 6 बजकर 21 मिनट से रात 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगा।

गणेश विसर्जन विधि और नियम

  • विसर्जन से पहले बप्पा की विधिपूर्वक पूजा और आरती करें।
  • गणेश जी को ताजे फूल, दूर्वा, सिंदूर और अक्षत चढ़ाएं।
  • इसके बाद बप्पा को मोदक या बूंदी के लड्डू को भोग लगाएं।
  • फिर पूरे परिवार के साथ गणेश जी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें।
  • हाथों में फूल व चावल लेकर भगवान से जाने-अनजाने में हुई भूलों के लिए माफी मांगें।
  • गणेश जी की प्रतिमा पर अक्षत और पुष्ण चढ़ाएं। इसके बाद लकड़ी की चौकी या प्रतिमा को थोड़ा सा खिसकाएं।
  • मूर्ति को को आदरपूर्वक चौकी सहित उठाकर घर के मुख्य द्वार की ओर लाएं। 
  • 'गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयघोष के साथ विसर्जन स्थल तक जाएं।
  • गणेश जी की प्रतिमा को किसी पवित्र जलाशय या घर पर पानी से भरे बड़े टब/बाल्टी में धीरे-धीरे विसर्जित कर दें।
  • अगर घर पर विसर्जन कर रहे हैं तो साफ बर्तन में पानी रखें और उसमें गंगाजल, फूल डालें। इसके बाद  श्रद्धा के साथ उस पात्र में  गणेश जी की मूर्ति को विसर्जित करें।

 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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