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गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है? जानिए कब और कैसे शुरू हुई यह पावन परंपरा

 Written By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 07, 2026 06:11 pm IST,  Updated : Sep 07, 2026 06:11 pm IST

गणेश विसर्जन के लिए अनंत चतुर्दशी तिथि सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। गणेशोत्सव या गणेश उत्सव का प्रारंभ चतुर्थी तिथि से होता है एवं इसका समापन चतुर्दशी तिथि के दिन होता है। फिर गणेशोत्सव के ग्यारहवें दिन, भगवान गणेश की प्रतिमा को नदी, तालाब या समुद्र में विसर्जित कर दिया जाता है।

गणेश विसर्जन से जुड़ी पौराणिक कथा- India TV Hindi
गणेश विसर्जन से जुड़ी पौराणिक कथा Image Source : PEXELS

हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेश उत्सव का आरंभ होता है। धार्मिक मान्यता है कि इसी तिथि में भगवान गणेश का जन्म हुआ था। भगवान गणेश के जन्म दिन के उत्सव को गणेश चतुर्थी के रूप में जाना जाता है।  गणेश चतुर्थी का उत्सव 10 दिनों तक मनाया जाता है, जिसे गणेश या गणपति उत्सव कहा जाता है। गणेश चतुर्थी का उत्सव अनंत चतुर्दशी के दिन समाप्त होता है और यह दिन गणेश विसर्जन के नाम से जाना जाता है। इस दिन श्रद्धालु बड़े ही धूमधाम के साथ भव्य तरीके से  भगवान गणेश की प्रतिमा का सरोवर, झील, नदी इत्यादि में विसर्जन करते हैं। इस साल गणेश चतुर्थी का उत्सव 14 सितंबर से आरंभ हो रहा है। वहीं गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026 को किया जाएगा।

गणेश विसर्जन क्यों किया जाता है? 

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने भगवान गणेश को महाभारत की कथा सुनाना शुरू किया और गणपति जी लगातार 10 दिनों तक उसे लिखते रहें। दस दिनों के बाद जब महाभारत की कथा पूरी हुई और वेद व्यास जी ने आंखें खोली तो देखा कि लगातार लिखते हुए गणेशजी के शरीर का तापमान बढ़ गया था। 10वें दिन कथा पूर्ण होने पर वेदव्यास जी ने गणेशजी को ठंडा करने के लिए सरोवर में स्नान कराया, जिसके बाद  ही उनके शरीर का तापमान सामान्य हो पाया। कहा जाता है कि जिस दिन वेद व्यास जी ने गणेश जी को स्नान कराया गया था उस दिन अनंत चर्तुदशी थी। तब से ही 10 दिन की पूजा के बाद गणेश जी की विसर्जन की परंपरा चली आ रही है।

गणेश विसर्जन से जुड़ी अन्य मान्यता

धार्मिक मान्यता है कि गणेश जी की प्रतिमा का जब विसर्जन किया जाता है तब वे अपने भक्तों के सारे विघ्न-बाधाएं, क्लेश और नकारात्मक ऊर्जा भी अपने साथ ले जाते हैं। वहीं जल को पंच तत्वों में से एक तत्व माना गया है जिनमें घुलकर प्राण प्रतिष्ठा से स्थापित गणेश की मूर्ति पंच तत्वों में समाहित होकर अपने मूल स्वरूप में मिल जाती है। यह परंपरा बताती है कि जिसका जन्म हुआ है, उसका अंत और पुनः नया आरंभ निश्चित है।

गणेश विसर्जन 2026 के लिए शुभ चौघड़िया मुहूर्त

  • चतुर्दशी तिथि प्रारंभ - सितंबर 24, 2026 को 11:18 पी एम बजे

  • चतुर्दशी तिथि समाप्त - सितंबर 25, 2026 को 11:06 पी एम बजे

  • प्रातः मुहूर्त (चर, लाभ, अमृत) - 06:28 ए एम से 10:59 ए एम

  • अपराह्न मुहूर्त (चर) - 05:02 पी एम से 06:32 पी एम

  • अपराह्न मुहूर्त (शुभ) - 12:30 पी एम से 02:01 पी एम

  • रात्रि मुहूर्त (लाभ) - 09:31 पी एम से 11:01 पी एम

  • रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर) - 12:30 ए एम से 04:59 ए एम, सितम्बर 26

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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