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CSAM मामले में सरकार का रूख साफ, Meta को समझनी होगी अपनी जिम्मेदारी

Meta पर सरकार ने फिर सख्ती दिखाते हुए कहा कि यह केवल एक मध्यस्थ नहीं, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर है, यहां एल्गोरिदम के जरिए कंटेंट की विजिबिलिटी तय होती है। इसे कंपनी के टूल बढ़ाते और लिमिट यानी सीमित करते हैं।

Meta- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH मेटा

भारत सरकार ने मेटा के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्ती दिखाते हुए कहा है कि यह एक साधारण मध्यस्थ नहीं रहा है, बल्कि सर्विस प्रोवाइडर है। मार्क जुकरबर्ग की कंपनी के पास प्लेटफॉर्म पर दिखाए जाने वाले कंटेंट का पूरा कंट्रोल रहता है। इसके सोशल मीडिया के एल्गोरिदम से यह तय होता है कि कौन सा कंटेंट देखा जाना चाहिए और कौन सा नहीं। ऐसे में कंपनी की कंटेंट को लेकर पूरी जिम्मेदारी बनती है।

Meta ने मानी गलती

हालांकि, बच्चों के आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर मेटा ने अपनी गलती मानी है और कहा कि बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को भारतीय एजेंसी को रिपोर्ट किया जाएगा। कंपनी के प्रवक्ता ने अपने बयान में कहा-

हमारे प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा हमारे लिए प्राथमिकता है और हम सरकार के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि इन अपराधों को अंजाम देने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए। इस नुकसान से निपटने के अपने प्रयासों को सामूहिक रूप से मजबूत करने के लिए, मेटा अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की रिपोर्ट सीधे I4C द्वारा संचालित साइबर क्राइम पोर्टल पर करेगा।

अन्य प्लेटफॉर्म को भी सख्त संदेश

Meta पर सख्ती दिखाने के साथ सरकार ने अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे कि X, Reddit आदि को स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर भारत में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। भारत में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को ऑपरेट करने के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इसपर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। सरकार ने सख्ती दिखाते हुए यह भी साफ किया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को बच्चों को नुकसान पहुंचाने वाले कंटेंट की पहचान करके उसे हटाने के लिए सक्रिय कदम उठाना होगा। अगर, कोई प्लेटफॉर्म ऐसा नहीं करता है तो सरकार उसके खिलाफ कार्रवाई करेगी।

क्या है CSAM मामला? 

बता दें NCPCR यानी राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने 3 जुलाई 2026 को मेटा को CSAM (बच्चों से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट) को लेकर नोटिस जारी किया था और कंपनी पर लगे आरोपों पर जवाब मांगा था। मेटा ने नोटिस जारी होने के करीब एक सप्ताह के बाद अपना जवाब NCPCR को सौंप दिया था। यह मामला 'BBC आई' की रिपोर्ट पर सामने आया था, जिसमें मेटा के प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री से संबंधित विज्ञापन दिखाए गए थे। आयोग ने रिपोर्ट पर स्वतः संज्ञान लेते हुए मेटा को नोटिस जारी किया था।

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