1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. 'बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से समझौता नहीं', सरकार की सख्ती के बाद मेटा ने उठाया बड़ा कदम

'बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से समझौता नहीं', सरकार की सख्ती के बाद मेटा ने उठाया बड़ा कदम

 Written By: Vineet Kumar Singh
 Published : Sep 15, 2026 09:28 am IST,  Updated : Sep 15, 2026 09:28 am IST

भारत सरकार की सख्ती के बीच मेटा ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों, खासकर बाल यौन शोषण सामग्री की जानकारी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। NCPCR और NHRC पहले ही मेटा के खिलाफ जांच कर रहे हैं। सरकार ने अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों को भी सक्रिय कार्रवाई की चेतावनी दी है।

Meta Child Safety India, Instagram Child Safety, NCPCR Meta Investigation- India TV Hindi
भारत सरकार की सख्ती के बीच मेटा ने बड़ा कदम उठाया है। Image Source : ANI/FILE

Highlights

  • मेटा बच्चों के यौन शोषण मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देगी।
  • सरकार ने कहा, बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
  • NCPCR और NHRC पहले ही Meta प्लेटफॉर्म्स पर लगे गंभीर आरोपों की जांच कर रहे हैं।

नई दिल्ली: भारत सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इसी कड़ी में टेक कंपनी मेटा 'Meta' ने बाल यौन शोषण और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े अन्य मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। सरकार का कहना है कि भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी शर्त है और इस मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बता दें कि बच्चों के आपत्तिजनक ऐड को लेकर मेटा ने पहले सफाई जारी की थी

'अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी'

सरकारी सूत्रों के हवाले से समाचार एजेंसी ANI ने बताया कि मेटा की ओर से बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को कानून लागू करने वाली एजेंसियों तक पहुंचाने का फैसला इस दिशा में पहला कदम है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि बच्चों के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए अभी और कदम उठाने की जरूरत है। सरकारी सूत्रों ने कहा, 'मेटा ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों की जानकारी संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देने पर सहमति जताई है। यह प्लेटफॉर्म को बच्चों के लिए सुरक्षित बनाने की दिशा में पहला कदम है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है।'

बच्चों की सुरक्षा पर सरकार है सख्त

सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा भारत में काम करने के लिए जरूरी शर्त है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, 'भारत में किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के संचालन के लिए बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा एक बुनियादी सिद्धांत है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।' सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को बच्चों के लिए खतरनाक और हानिकारक सामग्री की पहचान करने और उसे हटाने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे। अगर कोई प्लेटफॉर्म ऐसा करने में विफल रहता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से भी बातचीत

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार की बातचीत सिर्फ मेटा तक सीमित नहीं है। केंद्र सरकार दूसरे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी लगातार चर्चा कर रही है। सरकार चाहती है कि प्लेटफॉर्म ऐसी सामग्री की पहचान और उसे हटाने का काम पहले से और सक्रिय तरीके से करें, खासकर उस सामग्री का जो बच्चों के लिए खतरा पैदा कर सकती है। सरकारी सूत्रों ने कहा,

'सरकार दूसरे प्लेटफॉर्म के साथ भी लगातार संपर्क में है, ताकि ऐसी सामग्री की सक्रिय रूप से पहचान की जा सके और उसे हटाया जा सके।'

सरकार ने यह भी चेतावनी दी है कि जो प्लेटफॉर्म बच्चों को ऑनलाइन हानिकारक सामग्री से बचाने के लिए जरूरी सक्रिय कदम नहीं उठाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

NCPCR ने मेटा के खिलाफ शुरू की थी कार्यवाही

यह पूरा मामला तब और गंभीर हो गया जब राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने मेटा के खिलाफ कार्यवाही शुरू की। NCPCR ने मेटा के प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री से जुड़े कथित विज्ञापनों को लेकर जांच शुरू की थी। आयोग ने 'BBC आई' की एक रिपोर्ट का स्वत: संज्ञान लिया था। इस रिपोर्ट में Meta के प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री से संबंधित कथित विज्ञापनों का मामला सामने आया था। इसके बाद NCPCR ने 3 जुलाई 2026 को मेटा को नोटिस जारी कर इन आरोपों पर जवाब मांगा था।

NCPCR ने मेटा इंडिया को किया था तलब

मेटा ने नोटिस जारी होने के करीब एक सप्ताह बाद आयोग को अपना जवाब सौंप दिया था। इसके बाद NCPCR ने मेटा इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर और मेटा इंडिया के प्रमुख को आयोग के सामने पेश होने के लिए बुलाया। Meta India के प्रतिनिधि 9 सितंबर को NCPCR के सामने पेश हुए। इस कार्यवाही से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री की पहचान, रोकथाम और उसकी रिपोर्टिंग व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो गए हैं।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भी शुरू की जांच

इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने भी जांच शुरू की है। आयोग ने दिल्ली पुलिस को Meta से जुड़े आरोपों की व्यापक जांच करने का निर्देश दिया है। आरोप है कि Meta के स्वामित्व वाले इंस्टाग्राम पर पेड विज्ञापनों के जरिए भारत में बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री (CSAM) को बढ़ावा दिया गया। NHRC ने दिल्ली पुलिस से यह भी जांच करने को कहा है कि Meta और इस मामले से जुड़े अन्य पक्षों ने पॉक्सो एक्ट के तहत जरूरी रिपोर्टिंग नियमों का पालन किया था या नहीं।

जांच में सिर्फ सामग्री नहीं, रिपोर्टिंग भी अहम

इस पूरे मामले में जांच का दायरा सिर्फ इस बात तक सीमित नहीं है कि बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री ऑनलाइन मौजूद थी या नहीं। यह भी देखा जा रहा है कि जब ऐसी सामग्री सामने आई, तब उसे रोकने, हटाने और संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देने के लिए जरूरी कदम उठाए गए थे या नहीं। यानी जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि सोशल मीडिया कंपनियों ने बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों में अपनी कानूनी जिम्मेदारियों और अनिवार्य रिपोर्टिंग नियमों का पालन किया या नहीं। मेटा की ओर से अब बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को रिपोर्ट करने पर सहमति जताना इसी व्यापक जांच और सरकार की बढ़ती सख्ती के बीच एक अहम कदम माना जा रहा है। (ANI से इनपुट्स के साथ)

ये भी पढ़ें: Meta को सरकार की कड़ी चेतावनी, चाइल्ड सेफ्टी पर नियम तोड़े तो खैर नहीं! WhatsApp Username विवाद की भी होगी जांच

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत