SC Warning to WhatsApp: सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सऐप-Meta को चेतावनी देते हुए कहा है कि डेटा शेयरिंग के नाम पर देश के नागरिकों की प्राइवेसी के साथ खेल नहीं सकते हैं और इस देश में निजता के अधिकार की सख्ती से रक्षा की जाती है। सुप्रीम कोर्ट ने आज गोपनीयता नीति के लिए जुर्माना लगाने वाले सीसीआई के आदेश के खिलाफ व्हाट्सएप और मेटा की अपील पर सुनवाई करते हुए ये कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने कहा, "हम किसी बहुराष्ट्रीय कंपनी के व्यावसायिक हितों के लिए देश के नागरिकों की निजता से समझौता नहीं होने दे सकते।" बेंच 10 फरवरी को इस पर फैसला सुनाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने की कड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने व्हाट्सऐप का स्वामित्व रखने वाली मेटा से कहा कि इस देश में निजता के अधिकार की इतनी सख्ती से रक्षा की जाती है और आप जिस तरह की भाषा का प्रयोग करते हैं, वह इतनी चालाकी से गढ़ी गई है कि सड़क पर सामान बेचने वाला भी इसे नहीं समझेगा। ऑप्ट-आउट का सवाल ही कहां उठता है? लोग इस जटिलता को नहीं समझते। यह निजी जानकारी की चोरी करने का एक घटिया तरीका है, हम आपको ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।
डेटा का एक भी शब्द साझा करने की अनुमति नहीं दी जाएगी- सुप्रीम कोर्ट
सीजेआई ने पूछा कि क्या मेटा पर सीसीआई द्वारा लगाया गया जुर्माना जमा कर दिया गया है और उक्त राशि अगले आदेश तक निकाली नहीं जा सकेगी। उन्होंने ये भी पूछा कि क्या विकल्प है? विकल्प यह है कि अगर आप व्हाट्सएप सुविधा छोड़ भी देते हैं तो भी हम आपका डेटा साझा करेंगे? विकल्प बहुत सरल है कि या तो आप एक वचन दें। हम आपको डेटा का एक भी शब्द साझा करने की अनुमति नहीं देंगे और या तो आप एक वचन दें। आप नागरिकों के निजता के अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकते।
सुप्रीम कोर्ट ने नागरिकों के निजी डेटा को लक्षित विज्ञापन के लिए मेटा के साथ साझा करने पर व्हाट्सएप की कड़ी आलोचना की और इस तरह के डेटा शेयरिंग पर बैन लगाने की चेतावनी दी है। सुप्रीम कोर्ट ने व्हाट्सऐप और मेटा की याचिकाओं के मामले में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को पक्षकार बनाया और कहा कि वह अंतरिम आदेश पारित करेगा।
ये भी पढ़ें
Samsung Galaxy Unpacked 2026 Event की लॉन्च डेट लीक, धमाकेदार इवेंट में S26 सीरीज का इंतजार होगा पूरा