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पानी के अंदर तैरते दिखीं चमकती हुईं मछलियां, शरीर से जलती है Blue Light

इस चमकती मछली का वीडियो पहली बार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सामने आया, जिसे @AMAZlNGNATURE नामक अकाउंट से शेयर किया गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि कुछ मछलियां पानी में तैरती हुई दिख रही हैं और अंधेरे में उनकी चमक साफ तौर पर देखी जा सकती है।

जलती हुई मछलियां- India TV Hindi
Image Source : X/@AMAZLNGNATURE जलती हुई मछलियां

समुद्र की दुनिया बेहद ही रोमांचक और आश्चर्य से भरी हुई है। कहते हैं कि समुद्र में ऐसे-ऐसे जीव पाए जाते हैं, जिन्हें देख लोगों की आंखें फटी की फटी रह जाती हैं। यह भी कहा जाता है कि इंसानों ने अभी समुद्र का सिर्फ 10 प्रतिशत हिस्सा ही देखा है। बाकी 90 प्रतिशत हिस्सा आज भी इंसानों से अछूता है। कुछ ऐसा ही समुद्री अजूबा इस वक्त सोशल मीडिया पर देखने को मिला है, जिसका वीडियो खूब वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है कि पानी के अंदर कुछ मछलियां तैर रही हैं, जिनके शरीर से नीले रंग की रौशनी निकलती दिख रही है। ऐसा लग रहा है मानो किसी ने इन मछलियों के अंदर दिवाली वाली झालरों को फिट कर दिया है। ठीक दिवाली वाली झालरों की तरह ही ये मछलियां चमक रही हैं।

ताइवान के वैज्ञानिकों का कमाल

इस वायरल वीडियो को सोशल साइट एक्स पर @AMAZlNGNATURE नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। जिसे खबर लिखे जाने तक 15 लाख लोगों ने देखा और 36 हजार लोगों ने इसे लाइक किया है। इस वीडियो को पोस्ट करने वाले ने इससे जुड़ी कुछ जानकारी भी शेयर की है। जहां बताया गया है कि ये चमक रही मछलियां ताइवान के वैज्ञानिकों की रिसर्च का कमाल हैं। जिन्होंने हाल ही में ऐसी खोज कर डाली जिसने दुनिया भर के लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। दरअसल, वैज्ञानिकों ने कार्प मछली के डीएनए में जेलीफिश के जीन को मिलाकर एक ऐसी मछली विकसित कर दी जो अंधेरे में किसी लाइट की तरह चमकती है। इस अनोखी उपलब्धि का वीडियो इस वक्त सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इस चमकती मछली को देखकर हैरान हैं।

कैसे हुआ यह अनोखा कारनामा?

आपको बता दें कि ताइवान के वैज्ञानिकों का यह एक्सपेरिंमेंट मछलियों पर प्रदूषण के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझने के लिए किया गया है। जेलीफिश के बायोल्यूमिनसेंट जीन जो मछलियों के चमकने का कारण माना जाता है। उसे वैज्ञानिकों ने कार्प मछली के डीएनए में शामिल कर दिया। इस प्रक्रिया से वैज्ञानिकों को मछली के अंगों में प्रदूषकों के प्रभाव को वास्तविक समय में देखने में मदद मिलती है। बायोल्यूमिनसेंस, यानी जैविक चमक, मछली के शरीर में होने वाली प्रक्रियाओं को देखने लायक बनाती हैं। जिससे पर्यावरण में मौजूद जहरीले पदार्थों का प्रभाव आसानी से अध्ययन किया जा सकता है। वैज्ञानिकों ने जेनेटिक इंजीनियरिंग की तकनीक का उपयोग कर जेलीफ़िश के उन विशिष्ट जीन को कार्प मछली के डीएनए में जोड़ा, जो प्रोटीन उत्पन्न करते हैं। ये प्रोटीन अंधेरे में चमकते हैं, जिसे ग्रीन फ्लोरोसेंट प्रोटीन (GFP) के रूप में जाना जाता है। इस प्रक्रिया में, मछली के शरीर में एक विशेष प्रकार की रोशनी उत्पन्न होती है, जो इसे अंधेरे में इसे चमकदार बनाती है। 

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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