Viral Video : जर्मनी में रहने वाले एक भारतीय व्यक्ति ने बताया है कि कैसे जर्मनी में एक साल बिताने से काम, अनुशासन, व्यक्तिगत पहचान और रोजमर्रा की जिंदगी के प्रति उनका नजरिया बदल गया। भारत में छह साल काम करने के बाद जर्मनी चले गए शख्स ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो पोस्ट किया है जिसमें उन्होंने इस अनुभव को विनम्रतापूर्ण और ज्ञानवर्धक बताया है।
इंस्टग्राम पर वीडियो वायरल
इस वीडियो को इंस्टाग्राम पर @rishabhnmishra नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस वीडियो के कैप्शन में उन्होंने लिखा, 'भारत में 6 साल और जर्मनी में 1 साल का अनुभव। भारत से जर्मनी जान मेरे जीवन का सबसे चुनौतीपूर्ण, विनम्रतापूर्ण और अद्भुत अनुभव रहा है, न केवल पेशेवर रूप से, बल्कि एक इंसान के रूप में भी, एक बिल्कुल अलग कार्यप्रणाली को समझने का।' उन्होंने कहा कि जर्मनी ने उन्हें सिखाया कि वर्क लाइफ बैलेंस केवल कंपनियों द्वारा इस्तेमाल किया जाने वाला एक वाक्यांश नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति का अभिन्न अंग है। उन्होंने लिखा, 'यहां की कंपनियां कर्मचारियों के कल्याण को उत्पादकता के लिए एक संरचनात्मक कारक मानती हैं। यह किसी करियर वेबसाइट पर सुविधाओं का विवरण मात्र नहीं है, बल्कि यह कार्य घंटों, छुट्टियों और नेतृत्व संस्कृति में अंतर्निहित है।'
वीकेंड में आराम के महत्व को भी सीखा
शख्स ने अपने वीडियो के कैप्शन में आगे बताया कि, उनके लिए सबसे बड़े सांस्कृतिक बदलावों में से एक सार्वजनिक और पेशेवर परिवेश में मौन को समझना था। उन्होंने लिखा, 'मौन ठंडा नहीं, बल्कि सम्मानजनक है। जहां भारत में अक्सर बातचीत और त्वरित जुड़ाव को प्राथमिकता दी जाती है, वहीं जर्मनी ने उन्हें विराम, शांत बैठकों और सीमित बातचीत का महत्व सिखाया।' उन्होंने जर्मनी में रविवार के अलग अनुभव के बारे में भी बताया। उन्होंने लिखा, 'रविवार एक पवित्र विश्राम का दिन होता है। दुकानें बंद होती हैं। सड़कें शांत होती हैं। कोई डिलीवरी नहीं होती। पूरा शहर राहत की सांस लेता है।' उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआत में उन्हें इससे निराशा हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें वास्तविक छुट्टी और वीकेंड के आराम का महत्व समझ में आया।
नियम के बारे में भी बताया
शख्स ने आगे कहा कि जर्मनी में नियम केवल कानूनी नहीं बल्कि सामाजिक होते हैं। रीसाइक्लिंग और सड़क पार करने से लेकर सार्वजनिक परिवहन में व्यवहार और अपॉइंटमेंट के समय तक उन्होंने देखा कि लोग नियमों का पालन तब भी करते हैं जब कोई उन्हें देख नहीं रहा होता। उन्होंने लिखा, 'यहां अनुशासन सामूहिक लगता है, थोपा हुआ नहीं।' उन्होंने लिखा, 'भारत में, बातचीत अक्सर इस सवाल से शुरू होती है: आप क्या करते हैं? यहां, मुझे शौक, यात्रा और खेल के बारे में अधिक बातचीत देखने को मिली।'
भारत की ये चीजें आती हैं याद
भारतीय युवक ने बताया कि, उन्हें अभी भी अपनी मां के हाथ का खाना, भारतीय बाज़ार और मसाला चाय की याद आती है, लेकिन इस बदलाव ने उन्हें गहराई से बदल दिया है। उन्होंने लिखा, 'देश बदलना सिर्फ आपका पता नहीं बदलता, बल्कि यह आपके आत्म-दृष्टिकोण को भी बदल देता है।'
यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया
इस वीडियो को देखने के बाद कई यूजर्स ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। एक यूजर ने उनसे सहमति जताते हुए लिखा, "यह सच है", जबकि दूसरे ने कहा, "हां, मैं आपसे सहमत हूं।" तीसरे ने टिप्पणी की, "हां हां, यह सही है", जबकि एक अन्य ने कहा, "यह बात मेरे लिए भी मायने रखती है।"
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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