Aaj Ka Viral Video : अपना शहर और फैमिली छोड़कर आंखों में सपने लेकर हर युवा दूसरे शहर उन्हें साकार करने आता है। संघर्षों और जिम्मेदारियों के बोझ तले लोग एक समय कहीं न कहीं टूटने लगते हैं ऐसे में घर लौट जाने का ख्याल आना स्वाभाविक है। लेकिन, क्या हो अगर दूसरे शहर में सपनों को पंख लग जाएं और सफलता कदम चूमे...! आमतौर घर छोड़ने वाले युवा दूसरे शहर में सफल होने के बाद हमेशा के लिए अपने होमटाउन नहीं लौटते, वे उसी शहर में रहते-रहते अपनी नई दुनिया बना लेते हैं। मगर, सोशल मीडिया पर एक ऐसे लड़के का वीडियो वायरल हुआ है जिसने नोएडा में 14 साल तक काम करन के बाद सफल होते ही घर लौटने का फैसला किया और अब उसके इस कदम की हर कोई तारीफ कर रहा है।
पैदल चलने से लेकर SUV में चलने तक का सफर
वीडियो को इंस्टाग्राम पर @designwithvibhu नामक हैंडल से शेयर किया गया है। इस वीडियो में विभू त्रिवेदी ने नोएडा में बिताए अपने लंबे सफर, शहर द्वारा दिए गए पेशेवर विकास और समय के साथ महसूस किए गए व्यक्तिगत खालीपन पर विचार व्यक्त किए हैं। वीडियो में विभू ने कहा, 'पूरे 14 साल बाद, आज मैं नोएडा को हमेशा के लिए छोड़ रहा हूं। थोड़ा दुख है, लेकिन थोड़ी खुशी भी है। जब मैं पहली बार 2012 में इस शहर में आया था, तो मुझे आश्चर्य होता था कि क्या कोई मुझे कभी नौकरी देगा। लेकिन किसी तरह, नोएडा में ही मैंने जूनियर ग्राफिक डिजाइनर से लेकर क्रिएटिव हेड तक का सफर तय किया।' उन्होंने आगे बताया कि कैसे यह शहर उनके जीवन के कई महत्वपूर्ण पड़ावों का साक्षी बना। उन्होंने कहा, 'मैंने पैदल चलने से लेकर एसयूवी खरीदने तक का सफर तय किया है। मैंने होर्डिंग बनाने से लेकर खुद होर्डिंग पर चित्रित होने तक का सफर तय किया है।'
'यहां कोई किसी का नहीं है'
सफलता के बावजूद, विभू ने कहा कि उनके जीवन से कुछ महत्वपूर्ण धीरे-धीरे छिन रहा है। उन्होंने आगे कहा, 'इस शहर में एक चीज़ धीरे-धीरे मुझसे छीनी जा रही थी, और वो थे मेरे प्रियजन। यहां कोई किसी का अपना नहीं है; हर कोई सिर्फ अपने फायदे के बारे में सोचता है।' उन्होंने शहरी जीवन की दिनचर्या को एक थका देने वाला चक्र बताया और कहा, 'या मैं कह सकता हूं कि हम एक कभी न खत्म होने वाले चक्र का हिस्सा बन गए हैं। EMIचुकाने के लिए काम करना, जो शायद बुढ़ापे में काम आए।'
फालूदा बेचने वाले की बात बनी टर्निंग प्वाइंट
शख्स ने एक घटना साझा करते हुए बताया जिसने उनका नजरिया बदल दिया। उन्होंने कहा कि एक बार उन्होंने एक फालूदा बेचने वाले से पूछा कि अगर उसके पास बहुत सारा पैसा हो तो वह सबसे पहले क्या करेगा। उसने कहा, 'भाई, सबसे पहले मैं अपने गांव वापस जाऊंगा।' उस दिन मुझे एहसास हुआ कि इंसान पैसे का भूखा नहीं होता, बल्कि अपने प्रियजनों का भूखा होता है। इस वीडियो को "14 साल बाद घर लौटना मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है, नया ठिकाना कानपुर है" कैप्शन के साथ साझा किया गया था।
यूजर्स भी बात से हुए सहमत
इस वीडियो पर यूजर्स की कई प्रतिक्रियाएं आईं, जिनमें से कई ने शहरी जीवन, महत्वाकांक्षा और परिवार पर उनके विचारों से सहमति जताई। एक यूजर ने लिखा, 'यह बिल्कुल सच है, आखिरकार हर कोई शांति और अपने लोगों के साथ रहना चाहता है।' दूसरे ने कहा, 'नोएडा आपको करियर देता है, लेकिन घर आपको जीवन देता है।' तीसरे ने कहा कि, 'यह बात दिल को छू गई। हम सब EMI के पीछे भाग रहे हैं और यह भूल रहे हैं कि असल में क्या मायने रखता है।' एक अन्य यूजर ने कहा, 'कुछ हासिल करने के बाद घर लौटना एक अलग ही तरह की सफलता है।'
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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