नई दिल्ली: देश में ई-20 और फॉलिस फ्यूल को लेकर चल रही चर्चाओं और शंकाओं पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इंडिया टीवी को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा कि सरकार कोई भी नई तकनीक लाने से पहले उसकी टेस्टिंग करती है। पूरी टेस्टिंग के बाद ही ई-20 का इस्तेमाल शुरू हुआ। उन्होंने दावा किया कि अभी तक उनके पास कोई ऐसी शिकायत नहीं आई कि ई-20 के इस्तेमाल से गाड़ियों के इंजन खराब हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि कौन इस तरह का प्रोपेगैंडा कर रहा है मैं इसमें जाना नहीं चाहता। साथ ही गडकरी ने देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और पर्यावरण को बचाने के लिए इथेनॉल को भविष्य का ईंधन बताया।
बायोफ्यूल से किसानों को सीधा फायदा
नितिन गडकरी ने देश की आर्थिक स्थिति और प्रदूषण का उल्लेख करते हुआ कहा कि आज देश में 22 लाख करोड़ से ज्यादा का फॉसिल फ्यूल (जीवाश्म ईंधन) इंपोर्ट किया जाता है। हमारे रोड सेक्टर के कारण देश में 40 फीसदी वायु प्रदूषण का कारण यही फॉसिल फ्यूल है। अगर हम इस 22 लाख करोड़ के इंपोर्ट को बायोफ्यूल से रिप्लेस कर दें, तो यह पैसा देश के किसानों की जेब में जाएगा और उनका जीवन पूरी तरह बदल जाएगा।
क्या यह आत्मनिर्भरता देश के लिए उपयोगी नहीं?
नितिन गडकरी ने उदाहरण के तौर पर कहा कि जब मक्के से इथेनॉल बनने की शुरुआत हुई, तो मक्के की कीमतें बढ़ीं और किसानों को इससे काफी लाभ हुआ। इससे पहले गन्ने के किसानों को पैसे के लिए लंबा इंतजार करना होता था। गन्ने का भुगतान पाने के लिए उन्हें लंबा इंतजार करना पड़ता था। लेकिन आज हालात बदले हैं और इथेनॉल के आने से चीनी मिलों और गन्ना किसानों की किस्मत बदल गई है। गडकरी ने कहा, "क्या यह आत्मनिर्भरता देश के लिए उपयोगी नहीं है? क्या हमारे देश को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं होना चाहिए?"
'मारुति ने भी कहा कि इथेनॉल से इंजन खराबी की बात सामने नहीं आई'
सोशल मीडिया पर ई-20 से गाड़ियों के इंजन खराब होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनके पास अभी तक ऐसी कोई शिकायत नहीं आई है। यह प्रोपेगैंडा कौन कर रहा है, मैं इस चर्चा में नहीं जाना चाहता। जिसकी भी गाड़ी 2023 से पहले की है और ई-20 के कारण इंजन में खराबी आई है तो वह मेरे पास शिकायत दर्ज कराए। उन्होंने कहा कि गाड़ी का इंश्योरेंस भी होता है। इंश्योरेंस कंपनी भी इसकी जांच करेगी और बात सरकार के सामने आएगी। गडकरी ने बताया कि देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति समेत कई ऑटोमेबाइल कंपनियों ने यह क्लियर किया है कि ई-20 के इस्तेमाल से गाड़ियों में खराबी की कोई बात सामने नहीं आई है। पटना में एक गाड़ी के खराब होने का मामला आया था, लेकिन जांच में पता चला कि वह इथेनॉल नहीं बल्कि पेट्रोल में मिलावट की वजह से हुआ था।
माइलेज और तकनीक पर क्या बोले गडकरी?
माइलेज को लेकर सवालों पर गडकरी ने स्पष्ट किया कि शहरों में माइलेज पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता, हालांकि हाइवे पर माइलेज में मामूली कमी आ सकती है। उन्होंने फ्लेक्स इंजन (Flex Engine) की खूबी बताते हुए कहा कि इन इंजनों में 100 प्रतिशत तक पेट्रोल और 100 प्रतिशत तक इथेनॉल का इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि शहरों में जहां बार-बार ब्रेक लगाने पड़ते हैं, वहां हाइब्रिड फ्लेक्स इंजन तकनीक के जरिए ब्रेक लगाने पर अधिक बिजली पैदा होगी, जो गाड़ी की दक्षता को बढ़ाएगी। गडकरी ने कहा ई-20 का कोई नया इस्तेमाल नहीं हो रहा है। ब्राजील और दुनिया के कई अन्य देश 1970 से ही इसका सफल प्रयोग करते आ रहे हैं। भारत सरकार ने भी पूरी सरकारी टेस्टिंग और गहन अध्ययन के बाद ही इसे लागू किया है।
ये भी पढ़ें:
दिल्ली के कचरे से बनी हाइड्रोजन से चल सकती हैं शहर की बसें, नितिन गडकरी ने बताया प्लान