दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में बड़ा फैसला सुनाते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। करीब छह साल तक चली जांच, फॉरेंसिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और लंबी सुनवाई के बाद यह फैसला आया। इस मामले में कुल 11 आरोपी थे, जिनमें से 6 आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया।
अदालत ने ताहिर हुसैन को मुख्य रूप से आईपीसी की धारा 302 (हत्या), धारा 363 (अपहरण) और धारा 147 (दंगा) के तहत दोषी ठहराया है। दोषी साबित होने के बाद अब कोर्ट द्वारा उसकी सजा का ऐलान किया जाना बाकी है।
कोर्ट ने क्या कहा?
कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने संदेह से परे साबित कर दिया है कि 25 फरवरी 2020 की शाम करीब 5 बजे ताहिर हुसैन चांद बाग पुलिया पर जुटी गैरकानूनी भीड़ का हिस्सा था। कोर्ट ने कहा कि यह भीड़ हिंदू समुदाय के लोगों के खिलाफ हिंसा करने के इरादे से इकट्ठा हुई थी। भीड़ का मकसद दंगा करना, लूटपाट, आगजनी और लोगों व उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाना था।
अदालत ने अपने फैसले में कहा, ''गवाहों के बयानों से यह भी साबित हो गया कि यह भीड़ हथियारों से लैस थी। इसी भीड़ ने आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा को घेर लिया, उन्हें जबरन चांद बाग पुलिया की ओर ले गई और फिर उन पर बेरहमी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। ताहिर हुसैन इस गैरकानूनी भीड़ का सदस्य था। इसलिए भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 149 के तहत वह भीड़ द्वारा किए गए सभी अपराधों, जिनमें अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल है, के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार है।''
2020 में दंगों के दौरान हुई थी अंकित शर्मा की हत्या
अंकित शर्मा की हत्या 6 साल पहले उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे के दौरान हुई थी, उनका शव नाले में मिला था। उनके शव पर 50 से ज्यादा चाकू के वार के निशान मिले थे। इस पूरे मामले में ताहिर हुसैन समेत कुल 11 लोगों पर हत्या, दंगा भड़काने और धार्मिक विद्वेष फैलाने जैसी संगीन धाराओं के तहत आरोप तय किए थे जिसमें कोर्ट ने ताहिर समेत 5 आरोपियों को दोषी करार दिया है। सजा का ऐलान अभी नहीं हुआ है।
अब सवाल फांसी का या उम्रकैद का
कोर्ट ने ताहिर हुसैन को हत्या, अपहरण और दंगे जैसे गंभीर अपराधों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी माना है। कानून की नजर में हत्या सबसे गंभीर अपराधों में से एक है। आइए जानते हैं उसे कितनी सजा हो सकती है?
- अधिकतम सजा: अपराधी को मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा दी जा सकती है। इसके साथ ही दोषी पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया जाता है। आईपीसी की धारा 302 हत्या के अपराध के लिए सजा तय करती है। इस धारा के तहत यदि कोई व्यक्ति हत्या का दोषी पाया जाता है तो उसे मृत्युदंड या उम्रकैद की सजा हो सकती है।
- अपहरण से जुड़े मामलों में आईपीसी की धारा 363 लागू होती है। इस धारा के तहत अधिकतम सात साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
- धारा 147 दंगा करने के अपराध में 2 साल तक की कैद, जुर्माना या दोनों का प्रावधान करती है। यदि दंगाई घातक हथियार से लैस हों अधिकतम 3 साल तक की कैद या जुर्माना हो सकता है।
- दंगा मामलों में आईपीसी की धारा 149 भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है. इस धारा के अनुसार यदि किसी गैरकानूनी समूह द्वारा कोई अपराध किया जाता है तो उस ग्रुप का हर सदस्य उस अपराध के लिए समान रूप से जिम्मेदार माना जा सकता है।
ताहिर की सजा पर क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?
कोर्ट ने ताहिर हुसैन को मुख्य अपराध यानी धारा 302 (हत्या) और धारा 365 (अपहरण) में दोषी ठहराया है। धारा 302 के तहत अपराध सिद्ध होने पर कोर्ट के पास केवल दो ही विकल्प बचते हैं- आजीवन कारावास या मृत्युदंड या फांसी की सजा। अगर कोर्ट फांसी की सजा नहीं सुनाती है तो भी ताहिर हुसैन का पूरी जिंदगी सलाखों के पीछे कटना तय माना जा रहा है।
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