Amazing Facts : नई इमारत, दुकान, पुल या किसी सार्वजनिक परियोजना के उद्घाटन पर लाल फीता या रिबन काटना आज दुनियाभर में एक ट्रेंड बन चुका है। दुनिया भर के हर छोटे-बड़े इवेंट्स में आपने उस क्षेत्र की मशहूर हस्तियों को बड़ी-बड़ी कैंची से रिबन काटते देखा होगा। जिसे देखते ही ही तालियां बज उठती हैं, फोटो खिंचवाए जाते हैं और नया दौर शुरू होता माना जाता है। मगर, क्या आप जानते हैं कि, उद्घाटन के समय लाल रंग का ही रिबन क्यों काटते हैं ? आखिर इस परंपरा के लिए लाल रंग का रिबन ही क्यों चुना जाता है ? आज इसी बारे में हम आपको बताने वाले हैं।
कैसे शुरू हुआ ट्रेंड
रिबन कटिंग समारोह की सटीक उत्पत्ति तो अब तक अस्पष्ट है, मगर सोशल मीडिया पर वायरल रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकांश लोग इसे 19वीं शताब्दी के अंत से जोड़ते हैं। यूजर्स ऐसा मानते हैं कि, लाल रिबन काटने की परंपरा अमेरिका में लुइसियाना रेलवे लाइन के उद्घाटन (लगभग 1898) से शुरू हुई। रेलवे और पुलों जैसी बड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के पूरा होने पर इस तरह के समारोह आयोजित किए जाने लगे। इससे पहले शिप क्रिस्टनिंग (जहाजों का नामकरण) में भी रिबन का उपयोग होता था, जहां शैम्पेन की बोतल तोड़ी जाती थी और कभी-कभी रिबन काटा जाता था।
रोमन लोगों में भी थी रिबन काटने की परंपरा
कुछ विदेशी जर्नल में लाल रिबन काटने की परंपरा का इतिहास यूरोप में पारंपरिक विवाह समारोहों से भी जोड़ा जाता है। जहां नए घर के द्वार पर रिबन काटकर नई शुरुआत और बाधाओं पर विजय का प्रतीक माना जाता था। प्राचीन रोमन काल में बड़े निर्माण कार्यों पर रस्सी या रिबन काटने जैसी रस्मों का उल्लेख मिलता है, हालांकि ये आधुनिक रिबन कटिंग से अलग थे। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका में इंटरस्टेट हाईवे सिस्टम के विकास के साथ यह परंपरा और लोकप्रिय हुई। पुल, सुरंग और नई सड़कों के उद्घाटन पर रिबन कटिंग आम हो गई।
लाल रंग का ही रिबन क्यों काटा जाता है
भारत में यह परंपरा पूर्ण रूप से अपनाई गई है। मॉल, होटल, अस्पताल या सरकारी योजनाओं के उद्घाटन पर मंत्री, सांसद या स्थानीय नेता लाल रिबन काटते हैं। यह न केवल उत्सव का प्रतीक है बल्कि नई शुरुआत, प्रगति और सामूहिक सफलता का संदेश भी देता है। दरअसल, लाल रिबन का चयन सांस्कृतिक और प्रतीकात्मक कारणों से हुआ। कई संस्कृतियों में लाल रंग सौभाग्य, समृद्धि, ऊर्जा और बुराई से रक्षा का प्रतीक माना जाता है। चीन, भारत और अन्य एशियाई संस्कृतियों में लाल रंग शुभ माना जाता है। आधुनिक व्यापारिक समारोहों में लाल रिबन आकर्षक दिखने के साथ-साथ मीडिया में भी अच्छा लगता है। कुछ बौद्ध परंपराओं में लाल रंग नकारात्मक भावनाओं (घृणा, अज्ञान) का प्रतीक है, जिसे काटकर ज्ञान और शुद्धता का मार्ग खोलने का अर्थ निकाला जाता है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।
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