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अरब देशों को 'खाड़ी देश' क्यों कहते हैं, 99% लोगों को नहीं पता जवाब; क्या आपको मालूम है

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Jun 04, 2026 02:35 pm IST,  Updated : Jun 04, 2026 02:35 pm IST

GK Facts : सोशल मीडिया आपने सऊदी अरब और दुबई की रईसी के चर्चे तो खूब सुने होंगे। मगर, क्या आपको पता है कि अरब देशों को 'खाड़ी देश' क्यों कहते हैं ?

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अरब देशों को खाड़ी देश क्यों कहते हैं ? Image Source : PEXELS

GK Facts : जब हम संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कतर, कुवैत, बहरीन, ओमान या कुवैत की बात करते हैं तो अक्सर इन्हें लोग 'खाड़ी देश' या 'गल्फ कंट्रीज (Gulf Countries)' कहकर  संबोधित करते हैं। मगर, क्या आपने कभी सोचा है कि मिडिल ईस्ट के इन देशों को खाड़ी देश क्यों कहा जाता है ? ज्यादातर लोग सोचते हैं कि यह किसी सांस्कृतिक या धार्मिक वजह से है जबकि ऐसा नहीं है। बल्कि, अरब देशों को खाड़ी देश उनकी भौगोलिक स्थिति के कारण कहते हैं।

खाड़ी का क्या मतलब है

सबसे पहले तो जान लीजिए कि, 'गल्फ (Gulf)' का अर्थ है 'समुद्र का वह हिस्सा जो तीन तरफ से जमीन से घिरा हो और एक तरफ से खुले समुद्र से जुड़ा हो।' पश्चिम एशिया में ईरान और अरब प्रायद्वीप के बीच स्थित फारस की खाड़ी (Persian Gulf) ठीक यही है। यह हिन्द महासागर का एक विस्तार है, जो संकीर्ण जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए अरब सागर से जुड़ता है। जिन अरब देशों की समुद्री सीमा फारस की खाड़ी से लगती है, उन्हें भौगोलिक रूप से 'गल्फ कंट्री' या 'खाड़ी देश' कहा जाता है। वैश्विक परिप्रेक्ष्य में देखें तो दुनिया भर में और कई खाड़ी हैं। जैसे- बंगाल की खाड़ी, मैक्सिको की खाड़ी, कार्पेंटारिया की खाड़ी, फारस की खाड़ी। 

खाड़ी देशों में कौन-कौन से प्रमुख देश हैं 

बता दें कि, इराक भी खाड़ी से जुड़ा है लेकिन अक्सर GCC देशों को ही मुख्य खाड़ी देश माना जाता है। फारस की खाड़ी से सटे 6 अरब देश मिलकर खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council) का गठन करते हैं। GCC की स्थापना 1981 में हुई थी, जिसमें ये देश शामिल हैं: 

  • सऊदी अरब  
  • संयुक्त अरब अमीरात (UAE)  
  • कतर  
  • कुवैत  
  • बहरीन  
  • ओमान (आंशिक रूप से)

फारस की खाड़ी का इतिहास 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह खाड़ी हजारों वर्षों से फारस की खाड़ी के नाम से जानी जाती है क्योंकि प्राचीन फारसी साम्राज्य (आधुनिक ईरान) से इसका गहरा संबंध रहा। अंतरराष्ट्रीय मानचित्र, UN और अधिकांश विश्व संगठन आज भी इसी नाम का इस्तेमाल करते हैं। 1960 के दशक से अरब राष्ट्रवाद के उदय के साथ कुछ अरब देशों ने इसे 'अरब की खाड़ी' (Arabian Gulf) या सिर्फ खाड़ी कहना शुरू किया। यह नाम राजनीतिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'फारसी की खाड़ी (Persian Gulf)' ही मान्य है। 

खाड़ी देशों का महत्व 

यह क्षेत्र वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भू-राजनीति का केंद्र है। दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार यहां हैं। Strait of Hormuz से दुनिया का लगभग 20-30% तेल गुजरता है। हालांकि, ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते यह क्षेत्र काफी प्रभावित हुआ है और कई देशों में पेट्रो उत्पादों का संकट गहरा गया है। अपने इस उपयोगी क्षेत्र की बदौलत ही UAE और सऊदी अरब जैसे देशों ने तेल की कमाई से आधुनिक शहर बसाए।  बता दें ​कि, इन देशों की अर्थव्यवस्था तेल पर निर्भर थी अब विविधीकरण (डायवर्सिफिकेशन) की ओर बढ़ रहे हैं। दुबई, अबू धाबी इसके उदाहरण हैं। खास बात ये है कि, खाड़ी देश छोटी आबादी और विशाल संपदा वाले देश हैं, जहां विदेशी कामगारों की संख्या स्थानीयों से ज्यादा है। 'खाड़ी देश' नाम इन देशों की पहचान, संपदा और वैश्विक महत्व को एक साथ दर्शाता है जो दुनिया की ऊर्जा का महत्वपूर्ण द्वार है।

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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