कोलकाता: संदेशखाली मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) को एक बड़ी कामयाबी मिली है। कोलकाता की एक विशेष PMLA (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट) अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी शेख शाहजहां, उसके भाई शेख आलमगीर, शिब प्रसाद हाजरा और दीदार बोक्श मोल्ला के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के तहत आरोप तय कर दिए हैं।
ED की चार्जशीट में क्या है?
प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से दाखिल की गई चार्जशीट के अनुसार, शेख शाहजहां ने राजनीतिक संरक्षण और अपने गुर्गों के दम पर संदेशखाली में डर और दबदबे का साम्राज्य खड़ा कर लिया था। जांच में जमीन कब्जाने, अवैध मछली कारोबार, ईंट भट्ठों पर कब्जा, ठेके हासिल करने और अवैध वसूली जैसे आरोप सामने आए हैं। अवैध कमाई को मछली कारोबार की आय दिखाकर सफेद किया जाता था।
जांच के दौरान ED ने कई लग्जरी वाहन जब्त किए और करीब 27 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की हैं। मामले में गिरफ्तार चारों आरोपियों की जमानत पहले ही खारिज हो चुकी है और वे फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।
क्या है संदेशखाली का मामला?
दरअसल, पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित संदेशखाली का मामला जनवरी 2024 में तब चर्चा में आया, जब ED की टीम पर वहां हमला हुआ। इसके बाद वहां की स्थानीय महिलाओं ने TMC के तत्कालीन स्थानीय नेता शाहजहां शेख और उनके समर्थकों पर बेहद गंभीर आरोप लगाए। ED की टीम कथित राशन वितरण घोटाले के सिलसिले में शाहजहां शेख के घर छापेमारी करने पहुंची थी। इस दौरान शाहजहां के समर्थकों की भारी भीड़ ने ED अधिकारियों और केंद्रीय सुरक्षा बलों पर हमला कर दिया, जिसमें कई अधिकारी घायल हो गए। इस घटना के बाद शाहजहां शेख फरार हो गया था।
शाहजहां के फरार होने के बाद संदेशखाली की स्थानीय महिलाएं सड़कों पर उतर आईं। उन्होंने शाहजहां शेख और उसके दो मुख्य सहयोगियों (उत्तम सरदार और शिवप्रसाद हाजरा) पर गंभीर आरोप लगाए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन पार्टी कार्यालय बुलाया जाता था और उनके साथ रात में यौन उत्पीड़न किया जाता था।
स्थानीय किसानों और ग्रामीणों की जमीनों पर जबरन कब्जा कर उन्हें भेरी (मछली पालन के तालाब) में बदल दिया गया और उनका भुगतान भी नहीं किया गया। ग्रामीणों से बिना पैसे दिए या बहुत कम पैसों में जबरन काम कराया जाता था। भारी राजनीतिक और सामाजिक दबाव के बाद, लगभग 55 दिनों तक फरार रहने के बाद पश्चिम बंगाल पुलिस ने फरवरी 2024 के अंत में शाहजहां शेख को गिरफ्तार कर लिया। बाद में टीएमसी ने उसे 6 साल के लिए पार्टी से निलंबित कर दिया।
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