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नेपाल में फिर भूकंप के झटके, अब तक 38 भारतीयों की मौत

काठमांडू: भूकंप का कहर झेल रहे नेपाल की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। आज एक बार फिर नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। पिछले हफ्ते से नेपाल में जारी

अब तक 38 भारतीय के मारे जाने की खबर

नेपाल में पिछले सप्ताह आए विनाशकारी भूकंप में करीब 38 भारतीयों की मौत हुई है और 10 भारतीय घायल हैं। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। सरकार ने यहां बताया कि मृतकों का आधिकारिक आंकड़ा 6,600 से ऊपर पहुंच चुका है, जबकि घायलों की संख्या 16,500 से अधिक हो चुकी है।

नेपाल में खड़ा हो सकता है भोजन का संकट

पिछले हफ्ते आए विनाशकारी भूकंप की त्रासदी झेल रहे नेपाल में अपर्याप्त खाद्य भंडार के कारण खाद्य संकट का खतरा मंडराने लगा है। दक्षेस खाद्य बैंक में भी अपर्याप्त खाद्य भंडार को देखते हुए विशेषज्ञों ने यह चेतावनी दी है।

नेपाल के वित्त मंत्री राम शरण महात ने कहा, "हमें भोजन चाहिए, न कि तिरपाल और तंबू।"

उल्लेखनीय है कि नेपाल में यह विनाशकारी भूकंप ऐसे मौसम में आया है, जब वहां किसान धान और अन्य फसलों की बुवाई करने की तैयारी कर रहे थे। आपात स्थिति में भोजन उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से स्थापित दक्षेस देशों के खाद्य बैंक में भी पर्याप्त मात्रा में खाद्य भंडार उपलब्ध नहीं है।

दक्षेस देशों की 17वीं बैठक के दौरान सदस्य देशों ने बताया था कि दक्षेस फूड बैंक में 486,000 टन चावल का भंडार मौजूद है, जिसमें सभी सदस्य देशों का योगदान है।

एक राजनयिक ने आईएएनएस को बताया, "भारत का इसमें सर्वाधिक 306,400 टन का योगदान है। लेकिन हमने दक्षेस फूड बैंक में पर्याप्त मात्रा में खाद्यान्न का भंडार नहीं रखा है।"

संयुक्त राष्ट्र कृषि संगठन (एफएओ) ने 25 अप्रैल को आए भूकंप को नेपाल में 80 वर्षो में आया सबसे भयावह भूकंप बताया है और कहा है कि नेपाल में 35 लाख लोगों को भोजन मुहैया कराने की जरूरत है।

एफओए ने कहा है कि भूकंप से प्रभावित नेपाल के 80 लाख किसानों को फसलों को हुए नुकसान और धान की अगली फसल लेने के लिए तत्काल मदद की जरूरत है।

समाचार पत्र 'काठमांडू पोस्ट' ने अर्थशा मदन दहाल के हवाले से कहा, "चूंकि धान की बुवाई से ठीक पहले यह भूकंप आया है, इसलिए देश में खाद्यान्न उत्पादन की दिशा में भूकंप से प्रभावित किसानों को प्रभावी मदद मुहैया कराने की जरूरत है।"

उन्होंने कहा, "किसान तभी खेतों की और लौटेंगे जब उनका प्रभावी तरीके से पुनर्वास किया जाए।

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